आवास एवं विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार योजना के गंगा, यमुना और हिंडन एनक्लेव के आवंटियों ने परिषद पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शनिवार को वसुंधरा कार्यालय पर प्रदर्शन किया। आवंटियों का आरोप है कि परिषद बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के पजेशन दे रहा है। इतना ही नहीं पजेशन में तीन साल से अधिक की देरी हो चुकी है।
इसके बावजूद काम में लापरवाही की जा रही है। योजना में अभी तक बिजली और गंगाजल कनेक्शन उपलब्ध नहीं हुआ है। ऐसे में परिषद ने उनके साथ धोखा किया है।गंगा, यमुना व हिंडन एनक्लेव के आवंटी शनिवार सुबह परिषद के सर्किल ऑफिस पहुंचे और सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर से मुलाकात की। आवंटियों ने आरोप लगाया कि अब तक योजना का काम अधूरा है।
इसके बावजूद यहां आवंटियों को पजेशन दिया जा रहा है। बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के पजेशन देना गैरकानूनी है। आरोप है कि परिषद ने फंड के नाम पर आवंटियों के 24 करोड़ रुपये इकट्ठा किए हैं, मगर यहां न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही पानी। परिषद निजी बिल्डरों की तर्ज पर जेनरेटर से बिजली सप्लाई कर रहा है।
आवंटियों ने परिषद के कुछ अधिकारियों पर घोटाले का आरोप भी लगाया। यह भी आरोप है कि योजना के ब्रोशर में जितने बड़े क्षेत्रफल में पार्क और अन्य सुविधाएं बनाने का वादा था, अब सभी को छोटा कर दिया गया है। फ्लैटों के अंदर लगी सामग्री भी घटिया क्वालिटी की है।
लोगों ने चेतावनी दी कि अगर सभी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो वे परिषद कार्यालय पर धरने पर बैठ जाएंगे। इस संबंध में परिषद के अधीक्षण अभियंता केए सिंघल ने बताया कि आवंटियों की सभी समस्याओं को सुनकर उन्हें एक सप्ताह का समय दिया है। 25 फरवरी तक उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा।
ब्याज चुकाने की मांग
आवंटियों का आरोप है कि वह दो साल पहले ही फ्लैट की फुल एंड फाइनल पेमेंट कर चुके हैं। वह किराए पर रह रहे हैं और साथ ही हर माह बैंक की ईएमआई भी भर रहे हैं। ऐसे में परिषद को करीब तीन साल देरी का ब्याज चुकाना चाहिए। गौरतलब है कि परिषद ने गंगा, यमुना और हिंडन एनक्लेव में कुल 1290 फ्लैट लांच किए थे।
इनमें वन बीएचएके, टूबीएचके, थ्री बीएचके, फोर बीएचके और पेंट हाउस बनाए जाने थे। चार बार लांचिंग के बाद भी अभी तक 530 फ्लैट नहीं बिके हैं।