गाजियाबाद। लोनी क्षेत्र में विवाह के बाद बढ़े पारिवारिक विवाद से जुड़े रंगदारी, मारपीट और रुपये छीनने के आरोपों के मामले में अदालत ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर शिकायतकर्ता स्वयं अपने साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है, इसलिए पुलिस विवेचना की आवश्यकता नहीं है। शिकायतकर्ता के बयान दर्ज कराने के लिए 29 जुलाई की तारीख लगाई है।
रहीसमुद्दीन ने अदालत में दी अर्जी में आरोप लगाया कि वह पहले आरिफ के साथ कारोबार करते थे। उनके अनुसार कारोबारी संबंधों के दौरान आरिफ ने उनसे करीब एक लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में 14 नवंबर 2025 को उनके बेटे अहाद का निकाह आरिफ की बेटी शहनाज से हुआ। आरोप है कि निकाह के कुछ समय बाद जब उन्होंने अपने रुपये वापस मांगे तो आरिफ नाराज हो गया और अपनी बेटी को वापस अपने घर ले गया। शिकायत के अनुसार इसके बाद फोन पर पांच लाख रुपये की मांग की जाने लगी और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। आरोप है कि 22 मार्च 2026 को शहनाज की मां ने समझौते और बेटी को ससुराल भेजने की बात कहकर रहीसमुद्दीन और उनके बेटे को अपने घर बुलाया। वहां पहुंचने पर आरिफ समेत अन्य लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें एक कमरे में बंद कर पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि बाद में रिश्तेदारों के मौके पर पहुंचने पर उनसे दो लाख रुपये छीन लिए गए और जान से मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया गया। मामले की शिकायत पुलिस आयुक्त से भी की गई थी। हालांकि कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। थाना लोनी से मांगी गई रिपोर्ट में पुलिस ने इसे दोनों परिवारों के बीच का पारिवारिक विवाद बताया। पुलिस के अनुसार पति-पत्नी के बीच मतभेद चल रहे हैं और शहनाज अपने मायके में रह रही है। जांच में शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।