माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। एमएमजी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की यूनिट देने के बदले रिश्वत लेने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, एक लैब टेक्नीशियन ने जरूरतमंद से 2350 रुपये ऑनलाइन अपने बैंक खाते में भुगतान लेकर रक्त की यूनिट उपलब्ध कराई। इस मामले की शिकायत मेरठ स्थित सतर्कता अधिष्ठान में गई थी। इसके बाद जिलाधिकारी को जांच कराने की सिफारिश की गई। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने जांच समिति गठित कर दी है।
लालकुआं की पंचशील कॉलोनी निवासी नीरज कुमार ने 17 जून को भेजी शिकायत में बताया कि 22 मई को उनकी भाभी दीपिका को गौतमबुद्धनगर के सेक्टर-2 स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने खून की कमी की जानकारी दी और तत्काल एक यूनिट खून की आवश्यकता बताई। नीरज खून के इंतजाम के लिए एमएमजी अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे, जहां लैब टेक्नीशियन सुशांत शर्मा ने उनसे 2350 रुपये की मांग की। नीरज का आरोप है कि उन्होंने स्टाफ से कई बार निवेदन किया, लेकिन उन्हें बिना भुगतान के खून देने से मना कर दिया। अंततः एक मोबाइल नंबर पर फोनपे के माध्यम से ऑनलाइन 2350 रुपये भुगतान करने के बाद ही उन्हें खून की यूनिट दी गई। इस घटना के विरोध में नीरज कुमार ने मेरठ स्थित सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर सतर्कता अधिष्ठान के पुलिस अधीक्षक ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की सिफारिश की। जिलाधिकारी ने सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन को जांच के निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति का गठन कर दिया है। जांच टीम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अमित विक्रम और पुलिस लाइन स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. पंकज राकेश को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिया गया है कि सभी तथ्यों की बारीकी से जांच कर शीघ्र रिपोर्ट सौंपें। सीएमओ स्पष्ट किया कि यदि जांच में लैब टेक्नीशियन पर लगे आरोप सही पाए गए, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।