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Ghaziabad News: एआई बना महिलाओं का कारोबार पार्टनर, बढ़ा रहा आत्मविश्वास और कमाई

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गाजियाबाद। तकनीक के इस नए दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिर्फ बड़े आईटी संस्थानों या मल्टीनेशनल कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब घर-घर का साथी और महिलाओं के व्यापार और सपनों को नई उड़ान देने का जरिया बन रहा है। शहर की महिला उद्यमी हों या छोटे स्तर पर घर से काम करने वाली महिलाएं, सभी अपने कारोबार को गति देने के लिए एआई का बखूबी इस्तेमाल कर रही हैं।
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पहले जहां बैनर-पोस्टर का डिजाइन बनवाने के लिए बाजार जाना पड़ता था या आमंत्रण पत्र तैयार करने के लिए ग्राफिक डिजाइनर की मदद लेनी पड़ती थी, जिसमें समय और खर्च दोनों अधिक लगता था, वहीं अब महिलाएं एआई टूल्स के जरिए तत्काल आमंत्रण पत्र, थैंक्यू कार्ड, पोस्टर और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर रही हैं। इसके अलावा कारोबार आइडिया, लोन की जानकारी, सरकारी योजनाओं और बाजार में किस प्रोडक्ट की डिमांड है, इसकी जानकारी भी एआई से ले रही हैं। आयोजनों की थीम डिजाइन करने से लेकर क्लाइंट्स को यूनिक प्रपोजल देने, बजट प्लानिंग और प्रमोशन तक सभी काम एआई से हो रहे हैं।


इवेंट मैनेजमेंट में एआई का अनोखा इस्तेमाल

कविनगर की रहने वाली इवेंट कंपनी संचालक इंदू वार्ष्णेय ने बताया कि एआई ने उनका काम काफी आसान कर दिया है। जो काम पहले घंटों में होते थे, वह अब कुछ मिनटों में हो जाते हैं। वह ट्रे डिजाइन, कार्ड डिजाइन, पोस्टर डिजाइन और रेट लिस्ट भी एआई से तैयार कर लेती हैं। बैकग्राउंड के साथ फोटो तैयार करने और क्लाइंट को प्रेजेंटेशन देने में भी इससे काफी मदद मिलती है। थैंक्यू कार्ड और इनविटेशन कार्ड बनाना अब बेहद आसान हो गया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि लगातार एआई पर निर्भरता से खुद की क्रिएटिविटी पर असर पड़ रहा है।
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घर बैठे कारोबार को दे रहीं नई पहचान

गोविंदपुरम की रहने वाली शालू पांडे घर से ही बनारसी साड़ियों की सेल का काम करती हैं। उनके साथ कई महिलाएं जुड़ी हैं जो हैंडमेड प्रोडक्ट तैयार करती हैं। शालू बताती हैं कि प्रमोशन और बैनर डिजाइन से लेकर बाजार में क्या रेट चल रहा है और कैसे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है, इसकी पूरी जानकारी एआई से मिल जाती है। ग्राफिक डिजाइनिंग और डेटा एनालिसिस का काम भी वह खुद कर लेती हैं। पहले छोटे-छोटे कामों के लिए पति और बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब चीजें अधिक आसान हो गई हैं और आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
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