यूपी के चुनावी किले को फतह करने के लिए भाजपा के बड़े नेता भी अब ध्रुवीकरण की डगर पर चल निकले हैं। पश्चिमांचल में भाजपा नेताओं की सभाओं का जोर और नेताओं के एक के बाद एक बयान संकेत दे रहे हैं कि विकास की बात करने वाले प्रधानमंत्री की टोली को यहॉ से बढ़त बनाने के लिए पार्टी के परंपरागत एजेंडे और छवि का ही सहारा है।
शुक्रवार को खुर्जा व पिलखुआ में हुई सभाओं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी महंत योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर कैराना के पलायन और बूचड़खानों को हटाए जाने की बात को अपने भाषण में प्रमुखता से रखा।
योगी आदिनाथ की तर्ज पर अब अमित शाह ने भी वोटों के धुर्वीकरण का राग छेड़ दिया। पिलखुवा की जनसभा में शाह ने जहां कैराना बूचड़खाने बंद कराने का दॉव चलते हुए अप्रत्यक्ष रूप से गौरक्षा के लिए चुनावी हुकांर भरी वहीं कैराना पलायान का हवाला देकर अमित शाह ने साफ कहा कि ऐसा दुबारा नहीं होगा।
इसके साथ ही सपा पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि मुजफ्फर नगर दंगा और मथुरा का जवाहरबाग कांड को सपा के सियासी रूख को साफ करता है। वेस्ट यू पी में अपनी सीरिज ऑफ चुनावी सभाओं में जिस तरह से शाह हिदुत्व के एजेंडे पर बोले उसने साफ कर दिया
कि पिछले दिनों जिस तरह से योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर, खुर्जा, धौलाना समेत वेस्ट यूपी की अलग- अलग सभाओं में वोटों को एकीकृत करने की शुरूआत की । गोरक्षा और कैराना पलायन के मुद्दे को उठाकर उसे सियासी रंग देने की कोशिश की उसे शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष ने अपने भाषण से धार दे दी।
इससे साफ है कि भाजपा को लगने लगा है कि अगर उसे अपने वोटरों को बल्क वोट में तब्दील करना चाहती है तो उसे भी विकास, सुप्रशासन ,नोटबंदी और सर्जीकल स्ट्राइक के साथ वोटों के ध्रुवीक रण का दॉव भी चलना होगा।