गाजियाबाद। ई-रिक्शा में स्कूली बच्चे जोखिम भरा सफर कर रहे हैं। मिशन सेफ फ्यूचर के तहत परिवहन विभाग बच्चों की सुरक्षा के लिए मानक तय कर रहा है, लेकिन ई-रिक्शा चालक सभी मानकों को ठेंगा दिखा रहे हैं। क्षमता से अधिक बच्चों को लादकर ले जाने से हादसे का खतरा बना रहता है। कई बार ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं भी हो चुकी हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही। सोमवार को अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की।
सीन-1: खचाखच भरा ई-रिक्शा, आगे भी बैठे दो बच्चे
शास्त्रीनगर में एक ई-रिक्शा बच्चों से पूरी तरह भरा मिला। ड्राइवर के बगल में भी दो बच्चों को बैठाया गया था। यह ई-रिक्शा ट्रैफिक पुलिस के सामने से गुजरा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सीन-2: पीछे बैठाने के लिए जुगाड़
कविनगर में एक ई-रिक्शा पर सात बच्चों को बैठाया गया था। आगे के अलावा पीछे जुगाड़ लगाकर तीन बच्चों को बैठाया गया था।
सीन-3: क्षमता से अधिक बच्चों से भरा ऑटो
संजय नगर में एक ऑटो में करीब नौ बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। परिवहन विभाग ने ऑटो के लिए मानक तय किए हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा।
बोले अधिकारी
ई-रिक्शा स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए मान्य ही नहीं है। सस्ता होने के कारण अभिभावक इसका प्रयोग कर रहे हैं। विभाग की टीम स्कूलों में संपर्क कर ई-रिक्शा पर रोक के लिए कार्रवाई कर रही है। जल्द सड़कों पर भी अभियान चलाया जाएगा।
- डॉ. सियाराम वर्मा, आरटीओ प्रवर्तन