गाजियाबाद। मुरादनगर थाना क्षेत्र में मिलावटी मिट्टी के तेल और अवैध डीजल के कारोबार से जुड़े 22 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी सादाब को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष मुकदमे के मूल वादी और विवेचक की गवाही नहीं करा सका। वहीं, छापेमारी में जब्त माल और नमूनों को भी ठोस साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश नहीं किया गया। साक्ष्यों के अभाव और जांच प्रक्रिया में खामियों के चलते अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-एक अमित कुमार की अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने केवल सेवानिवृत्त पूर्ति निरीक्षक को मौखिक गवाह के रूप में पेश किया। जिरह के दौरान गवाह ने स्वीकार किया कि दुकान पर छापेमारी और माल सील करने के दौरान किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया था। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि कानूनी प्रक्रिया के तहत सील किया गया माल वर्तमान में कहां सुरक्षित रखा गया है। अदालत ने इन खामियों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि बरामदगी के दौरान स्वतंत्र गवाहों का न होना और जब्त माल को साक्ष्य के रूप में पेश नहीं कर पाना अभियोजन के मामले को कमजोर करता है। अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा।
22 साल तक चली कानूनी लड़ाई
मामला 21 और 22 अक्तूबर 2004 का है। रावली रोड स्थित चुंगी संख्या-3 के पास एक दुकान पर छापेमारी की गई थी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि छापेमारी करने वाले पूर्ति अधिकारी के पास घटना के दिन मुरादनगर क्षेत्र का आधिकारिक प्रभार नहीं था। उनके पास सक्षम प्राधिकारी एसडीएम का लिखित आदेश भी नहीं था।
मुरादनगर पुलिस ने इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। हालांकि, लंबी सुनवाई के बाद भी अभियोजन पक्ष आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने आरोपी सादाब को बरी कर दिया।