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वकील और बंदर की सात साल से दोस्ती: बेजुबान रोज चैंबर में आकर ले जाता है रोटी, महेश भी नहीं भूलते देना; वीडियो

Thu, 17 Sep 2026 06:43 PM IST
विकास कुमार माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद

सार

बंदर के चैंबर में पहुंचते ही महेश यादव को उसके आने का अंदाजा हो जाता है। कभी वह मेज पर आकर बैठकर रोटी का इंतजार करता है तो कभी उनकी जेब तक पहुंचकर रोटी निकालने की कोशिश करता है। महेश यादव उसे डांटने के बजाय प्यार से रोटी देते हैं। 
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वकील और बंदर की अनोखी दोस्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गाजियाबाद कचहरी में जहां हर दिन कानूनी दांव-पेच और मुकदमों की बहस होती है, वहीं इसी परिसर में इंसान और एक बेजुबान के बीच ऐसी दोस्ती भी है, जो बिना किसी भाषा के वर्षों से कायम है। करीब सात साल से अधिवक्ता महेश यादव और बंदर के बीच बना यह रिश्ता पशुओं के प्रति संवेदना और इंसानियत की मिसाल बन गया है। बंदर रोजाना उनके चैंबर के आसपास पहुंचता है और महेश यादव भी अपने इस बेजुबान दोस्त के लिए रोटी रखना नहीं भूलते।

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महेश यादव 30 साल से कर रहे वकालत
करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे महेश यादव पूर्व में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रह चुके हैं। वर्तमान में वह परिवार परामर्श मध्यस्थता केंद्र में दंपतियों के बीच चल रहे मनमुटाव को दूर कराने में भी भूमिका निभाते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वह चैंबर में आने वाले इस बेजुबान मेहमान के लिए समय निकाल लेते हैं।

प्यार से खिलाते हैं रोटी
बंदर के चैंबर में पहुंचते ही महेश यादव को उसके आने का अंदाजा हो जाता है। कभी वह मेज पर आकर बैठकर रोटी का इंतजार करता है तो कभी उनकी जेब तक पहुंचकर रोटी निकालने की कोशिश करता है। महेश यादव उसे डांटने के बजाय प्यार से रोटी देते हैं। रोटी मिलते ही बंदर उसे लेकर चला जाता है और कुछ देर बाद फिर चैंबर के आसपास दिखाई देने लगता है।

जिस न आएं महेश उस दिन चैंबर के करीब मंडराता है बंदर
दोनों के बीच लगाव इतना बढ़ गया है कि महेश यादव जिस दिन कचहरी नहीं पहुंचते, बंदर उनके चैंबर के आसपास मंडराता रहता है। अगले दिन अधिवक्ता के पहुंचते ही वह फिर उनके पास आकर बैठ जाता है। महेश यादव भी उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हैं और उसे रोटी खिलाते हैं।
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यह रिश्ता लोगों के चेहरे पर ला देता है मुस्कान
कचहरी में आने-जाने वाले अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए यह नजारा अब अनजाना नहीं है। मुकदमों और तनाव के बीच इंसान और अबोध पशु के बीच स्नेह का यह रिश्ता लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देता है। महेश यादव कहते हैं कि पशु बोल नहीं सकते, लेकिन उनके व्यवहार से भावनाओं को समझा जा सकता है। उनके और बंदर के बीच वर्षों से बना यह रिश्ता मानवीय संवेदना का उदाहरण है।
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