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आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के लिए बनाया जाएगा स्मारक, यूपी गेट पर लहराया जाएगा तिरंगा

Tue, 09 Feb 2021 07:15 AM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, साहिबाबाद
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गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान - फोटो : amar ujala
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भाकियू की तरफ से यूपी गेट पर आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की याद में एक स्मारक बनाया जाएगा। इसे बनाने में देश-विदेश से आंदोलन में आने वाले जल का प्रयोग होगा। किसान क्रांति गेट के पास बनने वाले इस स्मारक में तिरंगा लगाया जाएगा।

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राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन में देश और दुनिया के अलग अलग जगहों से जल लेकर लोग पहुंच रहे हैं। इस जल को यहां पर इकठ्ठा किया जा रहा है। पहले इस जल को गंगा नदी में डालने की योजना थी लेकिन संतों ने बताया कि गंगा जो देती हैं वह वापस नहीं लेतीं। जिसके बाद निर्णय लिया गया है कि आंदोलन स्थल पर एक स्मारक तैयार किया जाएगा। यह स्मारक आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के लिए बनाया जाएगा। इस स्मारक को बनाने में इस जल का प्रयोग किया जाएगा। इस स्मारक पर तिरंगा लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज पवित्र था, पवित्र है और पवित्र रहेगा। आने वाले समय में जब भी देश में किसान क्रांति होगी तो इस जगह को हमेशा याद रखा जाएगा।

धारा-144 के खिलाफ हुई सुनावाई, फैसला सुरक्षित
यूपी गेट के किसान आंदोलन स्थल पर लगाई धारा-144 के मामले में जिला जज की अदालत में सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने सुनवाई के बाद 10 फरवरी तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव ने प्रशासन द्वारा लगाई गई धारा-144 के खिलाफ अदालत में वाद दायर किया है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि आंदोलन खत्म कराने और किसानों पर दबाव बनाने के लिए प्रशासन ने धारा-144 व धारा-133 लगाई है। प्रशासन ने 27 जनवरी को किसानों और आम जनमानस के शांतिपूर्वक आंदोलन को गाजीपुर बॉर्डर से रात के अंधेरे में जबरदस्ती हटाने की कोशिश की थी। इस कार्रवाई की अधिवक्ताओं द्वारा निंदा की गई थी। 

जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल किया था। बहस के बाद तारीख लगा दी लेकिन कंडोलेंस होने के कारण अदालत ने तारीख लगा दी। बहस करने के दौरान नाहर सिंह यादव, औरंगजेब, जितेंद्र सिंह, रामपाल विश्वकर्मा, चरण सिंह सेन, नीलम श्रीवास्तव खालिद खान, जयवीर सिंह, रतन सिंह, रमेश यादव, विनोद शुक्ला, हरेन्द्र कसाना, राजेंद्र कसाना, महेश यादव, राजीव गुर्जर, देवेन्द्र शर्मा, गजेंद्र गुर्जर, सुरजीत सिंह, समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।

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