गाजियाबाद। नए साल के पहले दिन से ही आपको अपनी दवा के लिए भटकना पड़ सकता है। शहर की थोक और फुटकर की 5000 दवा दुकानों में से 4500 दुकानों पर एक जनवरी से बंदी का संकट आ गया है। यह संकट शासन के एक आदेश की वजह से पैदा हुआ है।
आदेश के तहत मेडिकल स्टोर चलाने के लिए फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि शहर में बमुश्किल से 500 दवा कारोबारियों के पास ही फार्मासिस्ट हैं। ऐसे में अगर लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ तो करीब 4500 दुकानें बंद हो जाएंगी और मरीजों को दवाओं के लिए भटकना पड़ सकता है।
लाइसेंस के नवीनीकरण के 31 दिसंबर 2016 तक वक्त है, लेकिन फार्मासिस्ट नहीं होने से लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है। इस वजह से दवा कारोबारी फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
दवा कारोबारियों का कहना है कि देशभर में फार्मासिस्ट की कमी है, ऐसे में कहां से फार्मासिस्ट लेकर आएं। डीआई विवेक कुमार सिंह ने बताया शासन की ओर जारी आदेश के तहत ही काम किया जा रहा है।
लाइसेंस नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर देना होगा। इस रजिस्ट्रेशन नंबर के बिना वेबसाइट का पेज खुलेगा ही नहीं और नवीनीकरण नहीं हो सकेगा। लाइसेंस के लिए फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर जरूरी है।
कलक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन
गाजियाबाद। गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन ने फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी, महामंत्री देवेंद्र राणा आदि पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि इस मामले में एक दवा कारोबारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।
अभी तक इसका फैसला नहीं आया है, लेकिन इसके बाद भी प्रदेश सरकार दवा कारोबारियों का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कर रही है। 31 दिसंबर तक इन लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं होगा तो वह सब निरस्त माने जाएंगे। इससे शहर में दवाओं का संकट खड़ा हो जाएगा। फार्मासिस्ट मिलेंगे नहीं तो दुकानें बंद करनी पड़ेगी।