गाजियाबाद। डूंडाहेड़ा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परिसर में प्रस्तावित बायो सीएनजी प्लांट अगले एक साल में बनकर तैयार हो जाएगा। (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित किए जा रहे प्लांट में रोजाना 1700 किलो सीएनजी का उत्पादन होगा। दावा है कि जल शोधन से उत्पन्न होने वाली गैस के सीएनजी में परिवर्तित होने से प्रदूषण में भी काफी हद तक कमी आएगी। बुधवार को प्लांट को विकसित करने के लिए दो कंपनियों के साथ निगम का एमओयू हस्ताक्षर हुआ। इस दौरान नगर महापौर सुनीता दयाल, आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, कंपनी और निगम के तमाम अधिकरी मौजूद रहे।
नगर आयुक्त ने बताया कि डूंडाहेड़ा में 70 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित है। इसमें जल को शोधित करने के दौरान मीथेन समेत अन्य प्रकार गैस का उत्सर्जन होता है। इनको स्वच्छ गैसों में बदलने का प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। प्लांट का संचालन होने पर रोजाना 1700 किलो सीएनजी का उत्पादन होगा। इससे करीब 3500 घरेलू चूल्हे चल सकते हैं। डूंडाहेडा में इसका सफल संचालन होने पर निगम के अन्य छह स्थानों पर संचालित हो रहे एसटीपी प्लांटों में इस भी यह शुरूआत होगी। बायो सीएनजी को कंपनियों को बेचा जाएगा। इससे होने वाली आय का कुछ हिस्सा कंपनी और कुछ हिस्सा निगम को मिलेगा। इसे शहर के विकास में लगाया जाएगा।
एसटीपी से सीएनजी बनाने वाला पहला प्लांट
नगर आयुक्त ने बताया कि पानी के शोधन के दौरान तमाम तरह की गैसों से प्रदूषण भी फैलता है, लेकिन प्लांट में जब बायो सीएनजी का उत्पादन शुरू होगा तो प्रदूषण से भी निजात मिलेगी और ऊर्जा उत्पादन के साथ आर्थिक लाभ भी होगा। नगर निगम गाजियाबाद में यह पहला ऐसा प्लांट विकसित हो रहा है जो एसटीपी से बायो सीएनजी बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है।