अब नेशनल टेस्ट हाउस बताएगा एलईडी लाइटों में घोटाले की सच्चाई
गाजियाबाद। शहर में लगाई गई एलईडी स्ट्रीट लाइटों को बदलने में घोटाला हुआ या नहीं इसका खुलासा नेशनल टेस्ट हाउस (लैब) की रिपोर्ट करेगी। कंपनी द्वारा लाइटों में घटिया और अनुबंध के विपरीत उपकरण लगाने के पार्षदों के आरोप के बाद अब नगर निगम ने स्ट्रीट लाइटों को जांच के लिए नेशनल टेस्ट हाउस में भेजा है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही आ जाएगी।
2016-17 में नगर निगम ने शहर में 50250 स्ट्रीट लाइटों को बदलकर एलईडी लाइट लगाने का जिम्मा व्हाइट प्लाकार्ट नाम की एक फर्म को दिया था। पीपीपी मॉडल पर बदली जाने वाली इन लाइटों की कीमत कंपनी को बिजली बिल से होने वाली बचत से भुगतान करना था। कंपनी को सात साल तक लाइटों की मेंटेंनेस भी करनी थी। कंपनी ने काम पूरा नहीं किया। शहर की करीब 10 से 15 फीसदी अभी भी बदलना बाकी है। व्हाइट प्लाकार्ट की ओर से लगाई गई लाइटें लगातार खराब हो रही हैं, लेकिन इनका मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है। निगम के कई पार्षदों ने लाइटों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना है कि जिस कंपनी की चिप लाइटों में लगाने का दावा किया गया था, वह नहीं लगाई गई। योजना विवादों में फंस जाने से नगर निगम ने कंपनी का भुगतान भी रोक दिया है। अब नगर निगम ने लाइटों की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए नेशनल टेस्ट हाउस लैब में सैंपल भेजे हैं।
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मेयर भी लिख चुकी अनुबंध निरस्त करने को पत्र
एलईडी स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता खराब होने और कंपनी द्वारा मेंटेनेंस कार्य न किए जाने के चलते महापौर आशा शर्मा ने भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने शासन को पत्र भेजकर कंपनी का अनुबंध निरस्त करने की सिफारिश की थी।
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कोट
स्ट्रीट लाइटों को जांच के लिए भेजा गया है। जल्द ही जांच रिपोर्ट मिल जाएगी। रिपोर्ट में स्पष्ट हो जाएगा कि स्ट्रीट लाइट में कौन से उपकरण लगे हैं। उनका मिलान अनुबंध से कर लिया जाएगा। - दिनेश चंद्र, नगरायुक्त