9 नवंबर 2016 का दिन गाजियाबाद के बच्चे-बच्चे को याद रहेगा। भारत सरकार द्वारा अचानक ही 500 और 1000 की करेंसी को बंद किए जाने के पहले दिन सभी परेशान नजर आए। बाजार में कारोबार काफी ठंडा रहा। ग्राहक 500 और एक हजार के नोट लेकर बाजार पहुंचे थे और ज्यादातर दुकानदारों ने बंद की गई करेंसी को लेने से साफ इंकार कर दिया।
रोजमर्रा की वस्तुएं आटा, दाल, चावल, सब्जी और दूध खरीदने के लिए भी लोग बडे़ नोट लेकर बाजार में परेशान होते नजर आए। किराना व्यापारी, कपड़ा व्यापारी, सराफा व्यापारी इन नोटों को लेने के लिए तैयार नहीं हैं। बाजार से छोटे नोट लगभग गायब हो गए हैं। दवाइयों की दुकानों पर भी नोट नहीं लिए।
कई जगह डॉक्टरों ने फीस के लिए 500-1000 के नोट लेने से इंकार कर दिया।अचानक से लिए गए फैसले का असर सबसे ज्यादा पेट्रोल पंपों पर पड़ा है। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर स्टॉक की समाप्त हो गया। जहां डीजल-पेट्रोल मिल रहा था वहां वाहनों की लंबी कतारे लगी थी। वहीं पंपों पर सिर्फ 500 या 1000 रुपये का ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा था।
इसे लेकर आरडीसी स्थित पेट्रोल पंप पर वाहन चालक और पंप कर्मियों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाया। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना कि ज्यादातर वाहन चालक 1000 रुपये का नोट दिखाता था और पेट्रोल 100 रुपये का डालने को कहता था। ऐसे में जल्द ही उनके पास खुले पैसे खत्म हो गए।
सराफा कारोबारियों ने बुधवार को मामूली कारोबार किया। दो दिन बाद से ही शादियों के साए शुरू होने जा रहे हैं। ऐसे में बाजार में लोग जेवरात खरीदने तो पहुंचे, मगर ज्यादातर लोगों को निराशा ही हाथ लगी। 1000 और 500 के नोट लेने से सराफा कारोबारियों ने साफ इंकार कर दिया।
हालांकि कुछ परिचित लोगों को सराफ कारोबारियों ने उधार सामान दे दिया, मगर स्थिति साफ कर दी कि उन्हें बदली हुई करेंसी ही चाहिए। सोने का भाव भी दुकानदारों ने मनमाना रखा। बुधवार को सोना 31 हजार से 35 हजार तक के भाव में बेचा गया।
500 के नोट बदलने पर कमीशन भी बढ़ा दिया गया है। कुछ दुकानदारों ने बाजार में सौ-सौ के नए नोट की गड्डी के बदले कमीशन के तौर पर ढाई हजार रुपये ज्यादा वसूल किए। वहीं पांच सौ के नोट के बदले 400 रुपये दिए गए। लोगों के पास 100 या इससे छोटे नोटाें की कमी है, जिसका फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं।
डासना टोल प्लाजा से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। बुधवार को अधिकांश वाहन चालकों द्वारा 500 का नोट दिए जाने पर उन्हें बाकी बची धनराशि नहीं दी गई। टोल कर्मियों द्वारा बताया गया कि फुटकर पैसे खत्म हो गए हैं। इसलिए बची धनराशि नहीं दी जा सकती। मजबूरी में वाहन स्वामी बिना रुपये लिए ही चले गए।
दूसरी ओर मसूरी क्षेत्र में ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। यहां छोटे दुकानदारों ने 500 या 1000 का नोट लेने से साफ इंकार कर दिया।
क्या कहते हैं लोग
- मजबूरी में ज्यादा रुपये के पेट्रोल लेना पड़ रहा है। सरकार के फैसले ने पब्लिक को परेशानी में डाल दिया है। - अमित सिंह
- जब मेरी स्कूटी में 500 रुपये से कम का पेट्रोल आता है तो इससे ज्यादा का तेल क्यों लूं। पंप कर्मी जबरदस्ती कर रहे हैं। कंपलेंट बुक मांगी वह भी नहीं दी। - आरके बहल
- बुधवार को जो भी ग्राहक आया वही 500 या 1000 का नोट लेकर आया। हमारा एक नंबर का कारोबार है। हमने 1000-500 के नोट स्वीकार किए। - दीपक कंसल, रेडीमेड गारमेंट व्यापारी
- किराना मंडी में बुधवार को कारोबार न के बराबर हुआ। अधिकांश ग्राहक बड़ा नोट लेकर आए थे जिसे किसी ने नहीं लिया। ढाई-तीन करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। - देवेंद्र
हितकारी, किराना व्यापारी
- बेटी की शादी 11 नवंबर को है। ब्याज लेकर शादी के लिए रुपये इकट्ठे किए। किराना मंडी में जब राशन के लिए आया हूं तो 500 और 1000 का नोट कोई लेने को तैयार नहीं है। - रामकिशन, ग्राहक
होटलों और रेस्टोरेंट में लगा कार्ड पेमेंट का बोर्ड
बुधवार को होटलों और रेस्टोरेंट में भी सिर्फ डेबिट और क्रेडिट कार्ड के पेमेंट करने का नोटिस लगा दिया गया था। बड़े होटलों और रेस्टोरेंट में कार्ड से पेमेंट लिया गया। राजनगर की रहने वाली महिलाओं का एक ग्रुप सुबह राजनगर में किटी पार्टी मनाने के लिए आया, जिनको कार्ड से पेमेंट करना पड़ा।
मानिका, पल्लवी, रश्मि माहेश्वरी, मनीता अर्चना सिंह आदि महिलाओं ने बताया कि प्रोग्राम पहले से फाइनल था। यहां आकर पता चला पांच सौ और हजार के नोट नहीं लिए जाएंगे। बाद में कार्ड से पेमेंट किया।
इलाज के लिए गुल्लक से निकालना पड़ा पैसा
फैसले केदूसरे दिन के खर्च के पैसों के लिए लोगों को बच्चों की गुल्लक तोड़नी पड़ी। कविनगर के रहने वाले देवेंद्र सिंह को अपनी प्रेग्नेंट वाइफ के चेकअप के लिए गुल्लक से पैसे निकालने पड़े। इसके अलावा दूध-सब्जी, ब्रेड आदि के लिए भी बच्चों के गुल्लक से ही काम चलाना पड़ा।
महिलाओं ने सब्जी ली उधार
खुले पैसे न होने पर सब्जी वालों ने उधार दिया वहीं कुछ दुकानदारों ने मौके का फायदा उठाते हुए सब्जियों के दाम बढ़ा दिए। कृष्णा मलिक और विमला मल्होत्रा ने बताया कि फल वाला सेब के दाम 125 बता रहा था और दो सौ रुपये के सेब लेने पर खुले पैसे देने का ऑफर कर रहा था। वहीं खुले पैसे न होने के कारण जरूरी सब्जी भाजी के लिए सब्जी वाले से मिन्नत करके उधार लेना पड़ा।
दवाओं की दुकानों पर हुई परेशानी
दवाओं की दुकानों पर ग्राहकों को परेशानी झेलनी पड़ी। दो सौ और तीन सौ रुपये तक की दवाएं मेडिकल स्टोर संचालकों ने देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि इतने खुले पैसे कहां से लाएं। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के इलाज के पैसों के लिए अस्पतालों में चेक या उधार पर मामले निपटाने पड़े।
मुजफ्फरनगर से आई दीपा त्यागी ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाने आई थी। उन्होंने बताया कि लगभग 900 रुपये का बिल आया। कुछ कफ सीरप व अन्य दवा लेकर बिल को एडजस्ट कराना पड़ा।
बिजली काउंटर पर उपभोक्ता हुए निराश
पावर कारपोरेशन के बिलिंग काउंटर पर बिल जमा कराने पहुंचे उपभोक्ताओं को निराशा हाथ लगी। आला अधिकारियों केनिर्देश पर नेहरूनगर सहित विभिन्न काउंटरों पर 500 और 1000 रुपए के नोट नहीं लेने का नोटिस चस्पा कर दिया गया। सरकारी विभाग के काउंटर पर इन नोटों के चलने की उम्मीद के कारण सैकड़ों उपभोक्ता पहुंचे थे।
लेकिन नोटिस चस्पा देख उपभोक्ता वापस लौट गए। काउंटरों पर केवल चेक और 100 रुपए के नोट ही स्वीकार किए गए।
बड़े नोट बंद, यात्रियों की आफत
रेल यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अधिकांश यात्री इन नोटों को लेकर टिकट काउंटर्स पर पहुंचे। ऐसे में काउंटर्स पर भी 100-50 के नोटों की किल्लत शुरू हो गई। दोपहर बाद यह हालात हो गए कि रेलवे काउंटर्स पर तैनात कर्मचारियों ने भी 50 व 100 रुपये के टिकट के लिए 500 रुपये का नोट लेना बंद कर दिया।
यात्रियों ने इसका विरोध भी किया। क्लर्कों और यात्रियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। काउंटर पर खुले पैसे न होने के चलते बुकिंग क्लर्क ने तीन-चार यात्रियों का ग्रुप बनाकर टिकट दिए और उनसे इकट्ठा भुगतान लिया। रिजर्वेशन काउंटर्स पर भी ऐसी ही दिक्कत रही। 500 से कम कीमत के टिकट लेने पर यात्रियों से खुले पैसे लिए गए।
200-300 के टिकट लेने वालों से 1000-500 के नोट स्वीकार नहीं किए गए। रोडवेज बस अड्डे पर भी यही हाल रहा। परिवहन निगम के पास 100-50 के नोटों की किल्लत हो गई।
अफसर-कर्मचारी चुपके-चुपके बदलवा ले गए नोट
मंगलवार रात जैसे ही 500 और 1000 के नोटों का चलन बंद होने की खबरें टीवी पर प्रसारित हुई, रेलवे के अफसरों और कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया। वह भी बुकिंग काउंटर्स पर पहुंच गए और 500 व 1000 के नोटों के बदले 100 के नोट लिए। गाजियाबाद स्टेशन पर देर रात तक नोट बदलवाने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों की भीड़ लगी रही।
यही वजह रही कि बुधवार सुबह 100-50 के नोटों की किल्लत हो गई।
बैंकों में आज से बदले जाएंगे बडे़ नोट:
केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोट को चलन से बाहर करने के बाद आज से बैंकों में पुराने नोट बदलने का काम शुरू होगा। एसबीआई ने तो इसके लिए अलग से कैंप लगाने की बात कही है। एसबीआई के रीजनल मैनेजर सुनील कुमार गोयल ने बताया कि 100 के नोट बांटने के लिए गाइडलाइन आई है।
ग्राहक जब 500 और 1000 का नोट बदलने के लिए कैंप आएं, तो अपने साथ जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड भी साथ लेकर आएं। ग्राहकों को एक फार्म भरना होगा और काउंटर पर कोई भी एक दस्तावेज को दिखाना पड़ेगा। एक बार में केवल 4000 हजार रुपये ही बदले जाएंगे।
प्रक्रिया नोट समय अवधि लिमिट कहां होंगे जमा
नोट बदलना पुराने नोट 10 नवंबर-30 दिसंबर 4000 बैंक और पोस्ट ऑफिस
नोट जमा करना पुराने नोट 10 नवंबर-30 दिसंबर नो लिमिट बैंक और पोस्ट ऑफिस
नोट जमा करना पुराने नोट 31 दिसंबर-31 मार्च नो लिमिट आरबीआई
आहरण नए नोट 10 नवंबर के बाद अधिकतम- 10 हजार बैंक और पोस्ट ऑफिस
(प्रतिदिन या 20 हजार वीक) (स्लीप और चेक से)
आहरण नए नोट 10- 18 नवंबर 2 हजार प्रतिदिन एटीएम द्वारा
19 नवंबर के बाद 4 हजार प्रतिदिन एटीएम द्वारा
आज खुलेंगे डाक घर, बदले जाएंगे पुराने नोट
नवयुग मार्केट स्थित पोस्ट आफिस के हेड पोस्टमास्टर जेएस बिष्ट ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न 11 बजे से ही करेंसी बदलने का काम शुरू हो जाएगा। संभावित भीड़ देखते हुए दो काउंटर खोले जाएंगे। इसके साथ ही पैसे जमा और निकासी का कार्य दैनिक रूटीन के तहत होगा।
सीए से सलाह लेते नजर आए कारोबारी:
बडे़ नोटों के अचानक बंद होने के बाद शहर के कई कारोबारी अपने-अपने सीए से चर्चा करते नजर आए। ज्यादातर कारोबारी यही जानना चाहते थे कि बाजार में वह ग्राहकों से 500 और 1000 के नोट स्वीकार करें या नहीं। इसके अलावा कुछ कारोबारी सीए से इस परेशानी से बचने का रास्ता पूछते भी नजर आए। हालांकि उन्हें कोई संतुष्टि भरा जवाब नहीं मिल सका।
मोदी जी! बेटी की शादी कैसे करूं
500 और 1000 के नोट बंद होना कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। खन्ना नगर कालोनी निवासी एक व्यक्ति के घर में दो दिन बाद बेटी की शादी है। रुपये होने के बावजूद शादी की तैयारियां नहीं हो पा रही हैं, जिससे पूरा परिवार चिंतित है।
खन्ना नगर कालोनी निवासी सुरेंद्र सिंह की बेटी की 11 नवंबर को शादी है। दोस्तों, रिश्तेदारों को शादी के कार्ड भी बांटे जा चुके हैं। मंगलवार शाम 500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई।
दो दिन तक बैंक बंद हैं और बाद में सीमित निकासी होने की सूचना से परिवार परेशान है। उनका कहना है कि शादी की काफी तैयारियां हो चुकी हैं लेकिन कुछ सामान खरीदना बाकी है।