गंगा की गोद में फल फूल गए घड़ियाल, शुभ संकेत
गाजियाबाद। देश की सबसे बड़ी नदी गंगा में घड़ियालों के पुनर्वास कार्यक्रम के नतीजे शुभ संकेत दे रहे हैं। गंगा की गोद में पल रहे घड़ियाल तेजी से फल फूल रहे हैं। नौ साल गंगा में गोता लगाते-लगाते घड़ियाल एक मीटर से लेकर ढाई मीटर तक लंबे हो गए हैं। वजन के मामले में तो नतीजा और भी माशाअल्लाह है। छह किलो का घड़ियाल 150 किलो का हो गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि नर घड़ियालों के मुकाबले मादा घड़ियाल की ग्रोथ अधिक हो रही है। निचली गंगा क्षेत्र से ऊपरी गंगा क्षेत्र घड़ियालों को रहन-सहन के लिए ज्यादा अनुकूल लग रहा है। घड़ियालों की बायोमीट्रिक्स का यह रिजल्ट गंगा के पर्यावरण के लिए यह अच्छी बात है।
गंगा का दायरा देश में 2025 किमी का है। इसके किनारे करीब 40 प्रति आबादी बसती है। इस लिहाज से गंगा का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। डब्लूडब्लूएफ (विश्व प्रकृति निधि) की ओर से 2009 में गंगा में घड़ियालों को री इंट्रोड्यूस करने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। हस्तिनापुर सेंक्चुरी (एरिया 2073 वर्ग किमी) के मकदूमपुर से प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई। नौ खेपों में अब तक लखनऊ के कुकरैल ब्रीडिंग सेंटर से घड़ियाल के 726 बच्चे (नर और मादा) लाकर गंगा में छोड़े जा चुके हैं। छोड़े गए घड़ियाल बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर जिले में गंगा में विचरण कर रहे हैं।
घड़ियालों का बायोमीट्रिक्स रिजल्ट
गंगा में घड़ियाल रिलीज करने से पहले उनकी पूंछ पर डेड सेल वाले हिस्से में एक कोड बना दिया जाता है। घड़ियाल को पकड़कर कोड से छोड़ने की डेट और अन्य जानकारी ट्रेस हो जाती है। ऊपरी गंगा क्षेत्र में मार्च 2018 में बिजनौर बैराज से लेकर नरौरा बैराज तक मिले 18 घड़ियालों की बायोमीट्रिक्स (शारीरिक नापतौल) की गई थी। इनमें 14 मादा और चार नर थे। नापतौल में पाया गया कि मादा घड़ियाल का वजन 6.21 किलो प्रतिवर्ष के हिसाब से बढ़ा। लंबाई 36 सेमी प्रतिवर्ष के हिसाब से बढ़ी। नर घड़ियाल का वजन 5.65 किलो हर साल और लंबाई 32.61 सेमी प्रतिवर्ष बढ़ी। गंगा में घड़ियाल रिलीज करते समय लंबाई एक से सवा मीटर और वजन करीब छह किलो होता है।
900 किमी दूर तक फैले
गंगा में अपर स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम मिलाकर छोड़े गए घड़ियालों का दायरा करीब 900 किमी तक है। बिजनौर से लेकर मिर्जापुर तक गंगा में यह देखे गए। गंगा का यह सफाईकर्मी बढ़ रहा है। इंतजार इसके प्रजनन का है। जब यह खुद अपनी संख्या बढ़ाने लगेंगे। इस मकसद से यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
एक्सपर्ट का कहना
डब्लूडब्लूएफ के जलीय जैव विविधता के समन्वयक और घड़ियाल प्रोजेक्ट की निगरारी कर रहे वरिष्ट वैज्ञानिक डॉ. संजीव यादव का कहना है गंगा में घड़ियालों की ग्रोथ चौंकाने से अधिक खुशी होने वाली बात है। इनकी वजह से गंगा साफ और स्वच्छ रहेगी। घड़ियाल फल फूल रहे हैं इसका गंगा में मतलब जलीय जीवों का तंत्र सुरक्षित और संभावना जगाता है। घड़ियाल रहेंगे तो गंगा साफ रहेगी। पर्यावरण संतुलन बना रहेगा।
घड़ियालों की बायोमीट्रिक्स करने वाले एक्सपर्ट शाहनवाज बताते हैं कि घड़ियालों की ऐसी ग्रोथ निचली गंगा क्षेत्र में भी नहीं देखी गई। विश्व में यह पहली बार है कि छोड़े गए घड़ियालों को पकड़कर उनकी नापतौल की गई। नतीजे खुश करने वाले हैं। अभी तक रिजल्ट में जो सामने आया उसमें मादा घड़ियाल नर की अपेक्षा ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं।
आज ब्रजघाट पर चार हजार पॉलीथिन का कराएंगे त्याग
डब्लूडब्लूएफ की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर मंगलवार को ब्रजघाट पर पॉलीथिन मुक्त अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान घाट पर चार हजार लोगों के हाथ से पॉलीथिन लेकर उनको जूट व पॉलीथिन मुक्त बैग भेंट किया जाएगा। इससे घाट पर पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद करने का संदेश देने की कोशिश की जाएगी। पॉलीथिन के गंगा में जाने से जलीय जीव की जान को खतरा होता है। मछलियों के बच्चे पॉलीथिन से खेलने के चक्कर में उसमें फंस जाते हैं। बाहर नहीं निकल पाते और दम तोड़ देते हैं।