फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब गाजियाबाद कभी नहीं होगा स्मार्ट

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
अब गाजियाबाद कभी नहीं होगा स्मार्ट

गाजियाबाद। नगर निगम के अफसरों की उदासीनता की वजह से शहर के 20 लाख लोगों की उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया। गाजियाबाद का नाम चौथे और अंतिम चरण में भी स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल नहीं हो पाया। बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल होने में कामयाब रहे, लेकिन प्रदेश का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले गाजियाबाद को इस बार भी निराशा ही मिली।
स्मार्ट सिटी के चौथे और अंतिम चरण में देशभर के 19 शहरों ने भागीदारी की थी। इनमें से 10 शहरों का चयन होना था। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 9 स्मार्ट सिटी के नामों की घोषणा की है। इनमें गाजियाबाद का नाम शामिल नहीं है। इससे पहले केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के पहले चरण में 20 शहर, दूसरे चरण में 27 शहर, फास्ट ट्रैक राउंड में 13 शहर और तीसरे चरण में 30 शहरों का चयन किया गया था। इनमें से किसी भी राउंड में गाजियाबाद स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल नहीं हो पाया था। नवंबर 2017 में स्मार्ट सिटी मिशन का चौथा और अंतिम राउंड था। इसमें गाजियाबाद, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर समेत देशभर के 19 शहरों ने दावेदारी की थी। यूपी के तीन शहरों को तो मौका मिल गया, लेकिन प्रस्ताव में कमियों की वजह से गाजियाबाद फिर पिछड़ गया।
विज्ञापन


प्रस्ताव में रहीं कई कमियां
गाजियाबाद के स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में क्या कमियां रहीं, इसकी जानकारी अभी नगर निगम को अधिकृत रूप से नहीं मिली हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो इसमें 7-8 कमियां रही हैं। प्रस्ताव में कास्ट कनवर्जन कर अन्य विभागों की योजनाओं को समायोजित किए जाने के ब्यौरे की कमी थीं। इधर, निगम अधिकारी केंद्र सरकार से इसकी जानकारी जुटाने की बात कह रहे हैं।

दूसरे चरण में था बरेली-मुरादाबाद से आगे
गाजियाबाद स्मार्ट सिटी के दूसरे चरण में मुरादाबाद, बरेली और सहारनपुर तीनों से आगे था। दूसरे चरण में गाजियाबाद को 53वीं रैंक मिली थी, जबकि बरेली को 56वीं, मुरादाबाद को 60वीं और सहारनपुर को 61वीं रैंक मिली थी। इसके बाद गाजियाबाद यूपी के अन्य शहरों से पिछड़ता गया।

मंत्री और विधायक भी न दिला पाए स्मार्ट शहर का दर्जा
गाजियाबाद के सांसद और विधायक केंद्रीय-प्रदेश के मंत्रिमंडल में शामिल हैं। इसके अलावा इस बार गाजियाबाद की सभी पांचों विधानसभा में भाजपा के विधायक जीते हैं। बावजूद इसके शहर स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल नहीं हो पाया है। पूर्व में भाजपाइयों ने इसका ठीकरा प्रदेश की सपा सरकार पर फोड़ दिया था। अब केंद्र और प्रदेश दोनों में ही भाजपा की सरकार है।
विज्ञापन


स्मार्ट सिटी बनता तो मिलतीं ये सुविधाएं
24 घंटे बिजली सप्लाई, सोलर एनर्जी का इस्तेमाल
समुचित पानी की आपूर्ति, वेस्ट वाटर और रेन वाटर का पुन: इस्तेमाल करना
बेहतर सेनिटेशन, वैज्ञानिक विधि से कूड़ा निस्तारण
रेन वाटर हार्वेस्टिंग, स्मार्ट वाटर मीटरिंग
बेहतर आईटी कनेक्टिविटी और डिजिटलाइजेशन
मोटर रहित ट्रांसपोर्टेशन, साइकलिंग को प्रोत्साहन
इंटेलीजेंट ट्रैफिक सिस्टम
नो-व्हीकल जोन और गलियों का चयन
स्मार्ट पार्किंग, मल्टीलेवल पार्किंग
एनर्जी बचत वाली स्ट्रीट लाइट
ओपन स्पेस का इनोवेटिव इस्तेमाल
सिटीजन सेफ्टी, महिला और बच्चों की सुरक्षा

अधिकारी बोले
अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में क्या कमियां रहीं, जिनकी वजह से गाजियाबाद का नाम स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल नहीं हो पाया। अभी रैंक और अर्जित किए गए नंबरों की भी जानकारी नहीं मिली है। समीक्षा की जाएगी कि पिछड़ने के कारण क्या रहे। अपने फंड से शहर को स्मार्ट बनाने और सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा। - चंद्रप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें