गाजियाबाद। लखनऊ अग्निकांड के बाद शहर में सील किए गए 67 कोचिंग सेंटर व प्ले स्कूल फिर से संचालित होंगे। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसे देखते हुए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इन संस्थानों को राहत देने का फैसला किया है।
इसके लिए यह शर्त भी रखी गई है कि संस्थानों को दो माह के भीतर अग्नि सुरक्षा सहित सभी निर्धारित मानक पूरे करने होंगे। साथ ही चेतावनी दी गई है कि तय समयसीमा पूरी होने के बाद कमियां मिलने पर दोबारा सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
बीती 22 जून को लखनऊ के अलीगंज में एनिमेशन सेंटर में आग लगने से 15 युवाओं की जान चली गई थी। जांच में सामने आया था कि बिल्डिंग में आग से बचाव के और सेट बैक जैसे जरूरी उपाय नहीं थे। इसके बाद गाजियाबाद में भी सरकारी तंत्र ने ऐसी इमारतों और संस्थानों की जांच शुरू की थी, जिससे यहां लखनऊ जैसी घटना न होने पाए।
इस दौरान तीन दिन में 67 कोचिंग सेंटर, प्ले स्कूल, लाइब्रेरी समेत अन्य संस्थान सील किए गए थे। इनमें अग्नि सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन व आपात निकासी की सुविधा नहीं मिलने समेत विभिन्न खामियां पाई गई थीं। इन संस्थानों के संचालक अग्नि सुरक्षा की एनओसी भी नहीं दिखा पाए थे।
अब नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद इन शैक्षिक संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है। इसी को देखते हुए बुधवार को जीडीए सचिव विवेक मिश्र ने सील किए गए संस्थानों के संचालकों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) राहुल पाल भी मौजूद रहे। बैठक में संस्थानों के संचालकों ने छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता उठाई, जिसके बाद उनको सशर्त राहत देने का निर्णय लिया गया।
पूरे भवन की फायर एनओसी लेना संभव नहीं तो सत्यापन कराएं :
बैठक के दौरान कुछ संचालकों ने कहा कि वे किसी भवन के केवल एक हिस्से में संस्थान संचालित करते हैं, ऐसे में पूरे भवन की फायर एनओसी लेना उनके लिए संभव नहीं है।
इस पर सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले भवन अग्निशमन विभाग की एनओसी के दायरे में नहीं आते। ऐसे संस्थानों को अपने परिसर में सभी अग्नि सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराकर प्रमाण-पत्र देना होगा, जिसका अग्निशमन विभाग सत्यापन करेगा।