जनपद के कुल 152 गांवों में से 55 को प्रशासन ने खुले में शौच मुक्त कर दिया है। इनमें से पांच गांवों को तो सर्टिफिकेट भी दे दिया है। बाकी बचे 97 गांवों में भी ओपन डेफेकेशन फ्री (ओडीएफ) यानी खुले में शौच मुक्त करने की मुहिम तेजी से चलाई जाएगी। यही नहीं, नए वर्ष से खुले में शौच करने पर जुर्माना भुगतने के साथ ही जेल भी जाना पड़ सकता है।
डीपीआरओ वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मार्च 2017 तक जनपद के सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर देने का लक्ष्य है। इन गांवों से पांच से 10 लोगों को स्वच्छता चैंपियन बनाया गया है। इनकी टीम के जरिए अभियान को गति दी जा रही है।
जनवरी से जागरूकता अभियान के साथ ही आर्थिक दंड और सजा का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे जल्द से जल्द लोग शौचालय का प्रयोग करने की आदत डालें। कई गांवों में लोग बेहतर आर्थिक स्थिति होने के बावजूद खुले में शौच के लिए जाते हैं।
यहां तक कि आर्थिक तौर पर मजबूत कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो खुद शौचालय बनवाने का खर्च नहीं उठाना चाहते हैं और सरकारी मदद के लिए जानबूझ कर खुले में शौच के लिए जाते हैं।
अब आर्थिक रूप से संपन्न ऐसे लोगों पर शिकंजा कसा जाएगा, जिन्होंने शौचालय नहीं बनवाया है। जनवरी से खुले में शौच करने पर संयुक्त पंचायत अधिनियम 52 के तहत जुर्माना लगाया जाएगा, इसके साथ ही जेल की सजा भी हो सकती है।
इन गांवों को मिला सर्टिफिकेट
मछरी, अफजलपुर, मोहीउद्दीनपुर हिसाली, मटियाला, सीकरीकला गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। इन्हें कमिश्नर की ओर से सर्टिफिकेट भी मिल गया है। बाकी के 50 गांवों को अब उनके सर्टिफिकेट का इंतजार है। गांवों में मंडल स्तर की टीम क्रास चेकिंग कर रही है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही सर्टिफिकेट दिया जाएगा।