अवैध निर्माण होता रहा, जीडीए का सिस्टम सोता रहा
गाजियाबाद। शहर में अवैध निर्माण को लेकर जीडीए के अधिकारियों ने इतने गड्ढे खोदे, जो अब भरते नहीं दिख रहे हैं। स्वयं अवैध निर्माण की निगरानी करने वाले अधिकारी ही अवैध निर्माण के खेल में शामिल हो गए। अपनी आंखों के सामने वे यह सब होता देखते रहे। क्योंकि पूरा सिस्टम कार्रवाई की जगह संरक्षण देने पर उतारू था। इसी का नतीजा यह रहा कि गुलमोहर ग्रीन सोसायटी ने वर्ष 2011 से लेकर 2017 तक तीन दफा कंपाउंडिंग शुल्क जमा कराकर दो टावर खड़े कर दिए, जबकि एक बार कंपाउंड शुल्क लगाए जाने के बाद अगली बार अवैध निर्माण होने की स्थिति में बिल्डर के खिलाफ कार्र्रवाई होनी चाहिए थी।
जीडीए वीसी द्वारा जांच कराए जाने पर कई अहम खुलासे हुए। फाइलें खुलीं, तो पता चला कि जीडीए से जुड़े अधिकारी सारे मामले पर अनजान बने रहे। जब वर्ष 2011 में बिना नक्शे के निर्माण पाए जाने पर पेनल्टी (कंपाउंड शुल्क) लगाकर रेगुलर कर दिया गया था, तो कैसे बिना नक्शा पास निर्माण जारी रहा। बिल्डर ने वर्ष 2015 तक लगातार अवैध निर्माण किया। जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने वर्ष 2015 में फिर से कंपाउंड जमा कराकर अवैध निर्माण रेगुलर कर दिया। हद तो तब हो गई, जब 2015 के बाद भी अवैध निर्माण जारी रहा। इसके बाद 2017 में फिर से अवैध निर्माण पर कंपाउंड शुल्क लगाने की फाइल लगा गई। ऐसी स्थिति में कैसे इंकार किया जा सकता है कि जीडीए का सिस्टम कार्रवाई करने के बजाय पंगु साबित हुआ।
जाहिर है कि इस पूरे खेल में जीडीए अधिकारियों की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। जीडीए वीसी एवं जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी का कहना है कि नियम के तहत अगर एक बार कंपाउंड हो चुका था तो अगली दफा कार्रवाई होनी चाहिए थी। ऐसे में अधिकारियों की भूमिका पर संदेह स्वाभाविक है।
विस्तृत रिपोर्ट पर की गई सिफारिश
गुलमोहर ग्रीन सोसायटी के अवैध निर्माण को लेकर विस्तृत जांच कराई गई, जिसमें खुलासा हुआ कि पांच अधिकारियों ने पूरा मामला संज्ञान में आने के बाद भी कार्रवाई नहीं की। डीएम रितु माहेश्वरी का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर इन अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
सभी कंप्लीशन सर्टिफिकेट की जांच करेगा जीडीए
महानगर में विभिन्न ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के बिल्डरों को जारी किए गए पूर्णता प्रमाण-पत्रों (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) की जांच होगी। जीडीए की ओर से बीते एक साल के अंदर जारी पूर्णता प्रमाण-पत्रों को प्राप्त करने वाले बिल्डरों की एक सप्ताह में सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद बिल्डरों के भवनों की जांच होगी। शासन की ओर से बिल्डरों के प्रोजेक्टों की निगरानी के आदेश के बाद प्राधिकरण ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जीडीए की ओर से पारदर्शिता बरती गई या नहीं, इसकी भी जांच होगी। दूसरी ओर पूर्णता प्रमाण-पत्र नहीं लेने वाले बिल्डर भी जीडीए के रडार पर होंगे।