एनजीटी के आदेश ने उड़ाई लोगों की नींद
गंगा की सफाई को लेकर हुई सख्ती का असर अनूपशहर में दिखाई दे रहा है। शहर के नौ नालों का गंदा पानी जहां गंगा में आना बंद हो गया है, वहीं गंदगी के निस्तारण के लिए सीवर लाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है।
लेकिन गंगा के दोनों किनारे पर सौ मीटर की परिधि में सभी वैध व अवैध निर्माणों पर रोक के एनजीटी आदेशों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। अनूपशहर कस्बे के कई सौ घर व दुकान उसकी जद में आ रहे हैं। ऐसे में अगर दुकानों और घरों को तोड़ा गया तो लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
गंगा की सफाई को लेकर सख्ती का दिख रहा असर
गंगा की सफाई को लेकर सरकार की सख्ती का असर पिछले चार सालों से दिखाई देने लगा है। शहर के नौ नालों का पानी पहले गंगा में छोड़ा जाता था। जिससे कई बार गंगा का पानी पीना तो दूर नहाने लायक भी नहीं रहता था।
लेकिन गंगा में जाने वाले नालों का गंदा पानी बंद होने से गंगा का पानी काफी साफ हो गया है। गंगा को साफ सुथरा बनाने के लिए एसटीपी लगाया है। इसके अलावा गाजियाबाद जल निगम की ओर से सीवर लाइन का निर्माण भी काफी तेजी से चल रहा है। वहीं गंगा घाटों में श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए पूजा पाठ की सामग्री और अन्य कूड़े को उठाने का नगरपालिका रोजाना करती है।
सौ मीटर के दायरे में कई मकान और दुकान
करीब चार सौ साल पुराना अनूपशहर कस्बा गंगा के दक्षिण किनारे पर ही बसा हुआ है। जहां सैकड़ो सालों से गंगा आबादी से सटकर बह रही है। ऐसे में एनजीटी के सौ मीटर क्षेत्र के सभी वैध व अवैध निर्माण को लेकर आये नये दिशा निर्देशों से अनूपशहर कस्बे के कई सौ घर व दुकान जद में आ रहे हैं। जिससे हजारों की तादात में लोग प्रभावित होने वाले हैं।
अनूपशहर में गंगा किनारे गढ़ी,नागरशैली, मानकचौक, पोखर, छपैटी,गंगाद्वार, पवित्रपुरी, बबस्टरगंज व मदारगेट मौहल्ले आते हैं। जिनमें रहने वाले अधिकतर लोग मेहनतकश गरीब तबके से ताल्लुक रखते हें। कंजड़, वाल्मिीकि, मल्लाह, धीमर, अहेरिया, लोधी आदि जातियां किनारे की आबादी के तौर पर आबाद हैं।
एनजीटी का आदेश बनेगा परेशानी का सबब
मौहल्ला पवित्रपुरी निवासी पूर्व पालिकाकर्मी नत्थीमल सविता ने कहा कि पहले के एनजीटी के दो सौ मीटर के दायरे में नवनिर्माण पर रोक के आदेश का तो स्वागत है लेकिन सौ मीटर के दायरे के सभी वैध व अवैध निर्माणों पर एनजीटी का आदेश से गंगा किनारे रह रहे लोगों को परेशानी का सबब बनने वाला है।
ऐसे आदेश का क्रियान्वयन किया गया तो उसके खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जायेगी। क्यों कि इस आदेश से सैकड़ो लोगों का जीवन व आजीविका प्रभावित होने वाली है। एनजीटी ने गंगाघाटों की साफ सफाई को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है।
कर्णवास गंगा में बह रहा गंदा नाला
तहसील में कर्णवास, राजघाट, विहारघाट, नरवर, नरौरा, रामघाट छह गंगा तट है। कर्णवास में कल्याणी देवी घाट पर प्रर्यटन विभाग द्वारा लोगों के स्नान को तीस मीटर लंबा पक्का घाट का निर्माण किया गया है।
घाट के समीप कई बिरादरी के सौ से ऊपर संख्या में परिवार रहते है जिसका कच्चे नाले का गंदा पानी सीधा नालें में जा रहा है। पूर्णमासी व अमावस्या आदि त्योहारों पर गंगा स्नान व मां कल्याणी देवी के दर्शन को हजारों लोग आते है। हजारो की संख्या में प्लास्टिक पानी की बोतले व पॉलीथीन का गंदगी की घाट पर अंबार है।
एनजीटी के आदेश उनके पास नहीं आये हैं। आदेशों का अनुपालन कराया जायेगा। कावड़ मेला के चलते नगरपालिका परिषद अनूपशहर व जिला पंचायत को गंगातट पर साफ सफाई के विशेष निर्देश दिेय गये हैं। वह स्वयं भी साफ सफाई तथा अन्य इंतजाम की स्वयं मानीटिरिंग कर रही हैं। - शुभी काकन, एसडीएम अनूपशहर
प्रदूषण विभाग को सर्वे के लिए निर्देश दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - जसजीत कौर, सीडीओ बुलंदशहर
गंगा का जलस्तर बढ़ने से डाल्फिन को खतरा
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से नरौरा बैराज से गंगा नदी की अपस्ट्रीम में मौजूद राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन को खतरा हो सकता है। डाउन स्ट्रीम में गंगा के किनारे मछुआरों के अलावा अन्य गतिविधियों से डाल्फिनों को खतरा होने की आशंका रहती है।
बाढ़ के बाद नदी का जलस्तर कम होने के दौरान पानी की कमी भी डाफिनों के जीवन में संकट पैदा करती है। नरौरा से ब्रजघाट तक गंगा नदी के लगभग 85 किलोमीटर रामसर साइट डाल्फिन संरक्षित क्षेत्र है।
अनूपशहर नरौरा के बीच गंगा नदी के इस क्षेत्र में लगभग 6 डाल्फिन हैं। इस क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधि प्रतिबंधित है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर नरौरा बैराज के फाटक उठाकर पानी को गंगा नदी की डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाता है।
फाटकों के उठने के कारण अपस्ट्रीम में मौजूद डाल्फि न के नदी की डाउन स्ट्रीम में बहकर निकलने की संभावना रहती है। पूर्व में बाढ़ के दिनों में डाल्फिन डाउन स्ट्रीम में निकलने से डाल्फिनों पर खतरा मंडराने लगा था।
दरअसल डाउन स्ट्रीम में गंगा के किनारे मछुआरों के अलावा अन्य गतिविधियों से इनको खतरा होंने की आशंका रहती है। नरौरा-डिबाई रेंज के वन क्षेत्राधिकारी योगेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि डब्लूडब्लूएफ के सर्वे के अनुसार बाढ़ के दौरान इनके बैराज से डाउन स्ट्रीम में निकलने की संभावना को लेकर निगरानी रखी जाएगी।
बाढ़ के बाद गंगा नदी में जलस्तर कम होंने पर डाउन स्ट्रीम का सर्वे कराकर निकली डाल्फिन को अप स्ट्रीम में ट्रांसलोकेट कराया जाएगा। डाल्फिन को अप स्ट्रीम में ट्रांसलोकेट कराया जाएगा।