साहिबाबाद। लोनी में प्रदूषण पर लगाम नहीं लग पा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने दिसंबर 2025 से अब तक 400 से अधिक फैक्टरियों को सील किया है, इसके बावजूद मानसून में भी लोनी का एक्यूआई 100 से नीचे नहीं आया। जुलाई-अगस्त में जब जिले के अन्य स्टेशनों का एक्यूआई 100 से कम रहा, तब भी लोनी एक दिन भी ग्रीन जोन में नहीं आ सका।
करीब 15 लाख की आबादी वाले लोनी में 2,000 से अधिक पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में अवैध फैक्टरियां भी चल रही हैं, जिनका सही आंकड़ा पीसीबी के पास भी नहीं है। शिकायत मिलने पर टीम फैक्टरियों को सील करती है, लेकिन रात होते ही कई इलाकों से फिर जहरीला धुआं उठने लगता है। कई फैक्टरियों को तो दो-दो बार सील किया जा चुका है, फिर भी चोरी-छिपे काम जारी है।
जनवरी में स्विस एयर क्वालिटी कंपनी एक्यूआई एयर की 2025 की रिपोर्ट में लोनी को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया था। यहां का औसत पीएम 2.5 स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो बेहद खतरनाक श्रेणी में है। रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने एक्शन प्लान बनाकर छापेमारी तेज की, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। बीते सप्ताह ही जब शहर के सभी स्टेशनों का एक्यूआई 100 से कम था, तब लोनी का एक्यूआई 200 से अधिक मिला। इसके बाद टीम ने 25 फैक्टरियों पर छापा मारकर उन्हें सील किया।
लगातार सीलिंग के बावजूद हवा जहरीली क्यों बनी हुई है, इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुल कितनी अवैध फैक्टरियां चल रही हैं, यह बता पाना मुश्किल है।
बिजली कनेक्शन दोबारा जोड़ने पर लखनऊ तक रिपोर्ट
पीसीबी के सहायक पर्यावरण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि जिन फैक्टरियों को सील कर बिजली कनेक्शन कटवाए गए थे, वहां दोबारा कनेक्शन जोड़ दिए गए। मौके पर जाकर शिकायत सही पाई गई। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी और लखनऊ मुख्यालय को भेज दी गई है।
इन कॉलोनियों में चल रही अवैध फैक्टरियां
कृष्णा विहार, अमित विहार, आर्य नगर, रूपनगर, परमहंस विहार, गायत्री विहार, तिलक राम कॉलोनी, बेहटा हाजीपुर, पुष्पांजलि विहार और सरस्वती विहार समेत कई आवासीय कॉलोनियों में बिना लाइसेंस के अवैध फैक्टरियां संचालित हो रही हैं।