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डीएम के छापे में खुली पोल, 24 डॉक्टर समेत 131 स्टाफ गायब

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डीएम के छापे में खुली पोल, 24 डॉक्टर समेत 131 स्टाफ गायब
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गाजियाबाद। मरीज अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। लोगों को बीमार हालत के बीच लाइन में घंटों खड़े होकर बमुश्किल इलाज मिल पा रहा है। कारण स्वास्थ्य विभाग के हालात बद से बदतर हैं। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी-पीएचसी तक स्टाफ गायब है। सेटिंग का खेल चल रहा है और बिना स्वास्थ्य केंद्र जाए और मरीजों को देखे बगैर उन्हें सरकारी खजाने से तनख्वाह मिल जा रही है। बृहस्पतिवार को डीएम ने 13 टीमें लगाकर औचक निरीक्षण कराया तो पूरे सिस्टम की पोल खुल गई। 24 सीनियर चिकित्सकों समेत 131 लोग ओपीडी के समय नदारद मिले। उधर, नाराज डीएम ने सभी का वेतन रोककर स्पष्टीकरण मांग लिया है। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दे दिया तो मलेरिया विभाग के स्टाफ को अब सीडीओ ( मुख्य विकास अधिकारी) के दफ्तर में प्रतिदिन हाजिरी लगानी होगी।
बीते दिनों डीएम अजय शंकर पांडेय को गोपनीय शिकायत मिली थी कि स्वास्थ्य विभाग में भारी खेल चल रहा है। पीएचसी-सीएचसी पर काफी चिकित्सक जा नहीं रहे हैं या फिर कुछ ही समय मरीजों को देख रहे हैं। मलेरिया विभाग में भी बड़ी संख्या में स्टॉफ गायब है, जिसकी उपस्थिति सेटिंग के बाद बिना आए ही लग जाती है। शिकायत पर डीएम ने बिना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को खबर दिए गोपनीय तौर पर ऑपरेशन लापता चलाया, जिसमें सुबह 9 बजे से दोपहर 12 के बीच टीमें भेजकर नौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, संयुक्त जिला अस्पताल, एमएमजी, जिला मलेरिया विभाग के उपस्थिति रजिस्टर की जांच कराई। इस दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुराना में चार, निवाड़ी में दो, सैदपुर हुसैनपुर व भोजपुर में एक-एक, चिरौड़ी में आठ, फर्रुखनगर में दो और असालतपुर में दो लोग अनुपस्थित मिले। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोनी में सबसे अधिक 30, डासना में 30 और मोदीनगर में एक डॉक्टर व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ गायब था। उधर, संयुक्त जिला अस्पताल संजयनगर से 19 चिकित्सक और एमएमजी से एक चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं थे।
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मलेरिया विभाग से 19 लोगों का स्टाफ मिला गायब, सीडीओ दफ्तर में लगेगी हाजिरी
एमएमजी अस्पताल परिसर स्थित मलेरिया विभाग के एक कार्यालय से 19 लोगों का स्टाफ नदारद था। बताया जा रहा है कि प्रशासन को गोपनीय सूचना मिली थी कि मलेरिया विभाग में बड़ी संख्या में स्टॉफ गायब रहता है, जिनसे मासिक तौर पर अनुपस्थित रहने के बदले सेटिंग की धनराशि निर्धारित है। डीएम ने जिला मलेरिया अधिकारी को निर्देश दिया है कि अनुपस्थित मिले स्टाफ का इस माह का वेतन जारी न किया जाए। साथ ही उपस्थिति रजिस्टर तत्काल सीडीओ दफ्तर में उपलब्ध कराएं। जहां पर प्रतिदिन की हाजिरी समस्त स्टाफ को अगले एक महीने तक लगानी होगी।
एसीएमओ को प्रतिकूल प्रविष्ट का भी निर्देश
डीएम ने सीएचसी लोनी-मुरादनगर व पीएचसी चिरौडी से संबंधित अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही सीएमओ से पूछा कि है कि अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों के स्वास्थ्य केंद्रों के औचक निरीक्षण करने के क्या दायित्व हैं और बीते छह महीने में कितने निरीक्षण किए उनका ब्यौरा तत्काल मुहैया कराएं।
एप में प्रतिदिन फोटो अपलोड करने के निर्देश
औचक निरीक्षण में सामने आई स्वास्थ्य विभाग की कारगुजारी के बाद डीएम ने सख्त रुख अपनाया है। सीएमओ को निर्देश दिया है कि तत्काल सभी पीएचसी-सीएचसी पर बायोमैट्रिक मशीन लगाई जाएं। अगर कहीं पर पहले से लगी है और खराब है तो तत्काल ठीक कराया जाए। साथ ही सभी बायोमैट्रिक मशीन की कनेक्टिविटी को एनआईसी से लिंक किया जाए, जिससे की प्रतिदिन की निगरानी की जा सके। उधर, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात चिकित्सकों की उपस्थिति हेतु एप बनाने का निर्देश दिया गया है। एप विकसित होने पर स्वास्थ्य केंद्र के सामने खड़े होकर प्रतिदिन के अखबार के साथ फोटो लेकर अपलोड करनी होगी।
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कोट
निरीक्षण में बेहद चिंतापूर्ण व निराशाजनक स्थिति सामने आई है। इतनी खराब स्थिति की उम्मीद भी नहीं की जा सकती थी। स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में बैठक चिकित्सक निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। अब सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सभी की जवाबदेही तय होगी और आगे प्रशासन सीधे तौर पर सुनिश्चित करने जा रहा है कि सरकार की नीतियों के अनुरूप मरीजों को समय पर इलाज मिले। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
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