फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गाजियाबादी रहे आगे-Cordination

विज्ञापन
विज्ञापन
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गाजियाबादी रहे आगे
विज्ञापन

गाजियाबाद। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2018 के फाइनल नतीजों में गाजियाबाद के होनहारों ने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज की। वैशाली के रहने वाले पुखराज कमल ने 135वीं रैंक पाकर शहर का मान बढ़ाया। भाटिया मोड़ राधाकृष्ण कुंज निवासी जितेंद्र कुमार शर्मा ने दोहरी जिम्मेदारियां निभाते हुए परीक्षा में 392वीं रैंक प्राप्त की। इनके अलावा चिरंजीव विहार के धीरज अग्रवाल ने 423वीं, वसुंधरा निवासी आस्था जैन ने 541वीं और अभिमन्यु ने 610वीं रैंक हासिल कर गाजियाबाद का नाम देशभर में रौशन किया है।

और बेहतर रैंक की है पुखराज कमल की चाह
वैशाली सेक्टर-2 ए में रहने वाले पुखराज कमल ने यूपीएससी (सिविल सर्विस) में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 135वीं रैंक हासिल की है। हालांकि वह एक बार फिर से 2018-19 में परीक्षा में बैठक आईएएस रैंक हासिल करना चाहते हैं। सपना आईएएस बनना है। उनकी इस उपलब्धि से मां पदमा रानी बरनवाल काफी खुश हैं। उनके घर पर बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत कर उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है। इसके लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की है।
विज्ञापन



आरपीएफ हवालदार के बेटे जितेंद्र शर्मा ने पाया मुकाम
भाटिया मोड़ फ्लाईओवर के पास राधाकृष्ण कुंज में रहने वाले जितेंद्र कुमार शर्मा ने अपने पांचवें प्रयास में सिविल सर्विस परीक्षा में 392वीं रैंक हासिल की। गाजियाबाद आरपीएफ में हवलदार के पद पर तैनात पिता सुशील शर्मा और गृहणी मां श्यामलता शर्मा की जिंदगीभर तपस्या को जितेंद्र शर्मा ने साकार कर दिया। होली ट्रिनिटी स्कूल से 10वीं-12वीं व दिल्ली के दयाल सिंह कालेज से बीएससी करने के बाद उनका चयन आयकर विभाग दिल्ली में इंस्पेक्टर के पद पर हुआ। जॉब के साथ परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने अपने पांचवें अवसर में सफलता हासिल की। परिवार में माता-पिता के साथ पत्नी अंकिता, छोटा भाई मनोज और तीन साल का बेटा आदिराज है। मूलतह अलीगढ़ की अतरौली तहसील के दादौं गांव के रहने वाले जितेंद्र ने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने कार्यालय में सीनियर्स के मोटिवेशन से अपने खाली वक्त का सदुपयोग किया। टॉपिक्स के छोटे नोट और वीडियो नोट्स बनाकर लगातार रिवीजन किया। उन्होंने समय प्रबंधन और अनुशासन को सफलता का आधार बताया।

आईआईटी के बाद आईएएस बनना धीरज अग्रवाल का लक्ष्य
चिरंजीव विहार निवासी आईआईटी रुड़की से पासआउट धीरज अग्रवाल ने अपने तीसरे अवसर में सिविल सेवा परीक्षा में 423वीं रैंक हासिल की है। अलीगढ़ के मूल निवासी वाले धीरज अग्रवाल के पिता कृष्ण स्वरूप अग्रवाल रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला के दिल्ली कैंप ऑफिस में चीफ ऑफिस सुपरिटेंडेंट और मां कविता अग्रवाल गृहणी हैं। छोटी बहन अंशिका अग्रवाल बीटेक सीएस की छात्रा हैं। डीएवी साहिबाबाद से 10वीं व 12वीं करने के बाद 2013 में आईआईटी रुड़की से इलेकक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। धीरज ने बताया कि दिल्ली में कोचिंग के अलावा रोजाना सात से आठ घंटे नियमित पढ़ाई की। उनका लक्ष्य आईएएस बनना है, बचे हुए अवसरों में लक्ष्य पाने की पूरी उम्मीद है।

दूसरे अवसर में आस्था जैन ने पाया मुकाम
उधर, वसुंधरा सेक्टर-14 निवासी आस्था जैन ने भी यूपीएससी परीक्षा में 541वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। अस्था 2015 में दिल्ली टैक्रीकल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की थी। यह उनका दूसरी कोशिश थी। यूपीएससी में रैंक हासिल करने पर उनके पिता डा. पीके जैन और मां डा. सुषमा जैन काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि यूपीएससी के लिए उन्होंने काफी पढ़ाई की। कोचिंग के साथ साथ घर पर भी कई घंटे तक पढ़ाई करती थीं। उनकी दिन रात की गई मेहनत और माता पिता के आशीर्वाद का नतीजा है कि उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
विज्ञापन


लक्ष्य पाने को अभिमन्यु का संघर्ष रहेगा जारी
वसुंधरा सेक्टर तीन में रहने वाले अभिमन्यु पोसवाल ने भी यूपीएससी परीक्षा में 610 रैंक हासिल की है। परिणाम आने के बाद से ही उनके घर में खुशी की लहर है। अभिमन्यु ने बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने आईपी यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की थी। उनके पिता कनक सिंह और मां उर्मिला पोसवाल दिल्ली के सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। दोनों ने ही उनका पूरा समर्थन किया। इससे पहले वह दो बार परीक्षा दे चुके हैं। इस बार उन्हें सफलता हासिल हुई है। वह आईएएस बनना चाहते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें