जिला कारागार में सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी है और बंदी-कैदियों की संख्या कारागार की क्षमता के सापेक्ष दो से ढाई गुना अधिक है। बंदियों को बैरकों में ठूंसा जा रहा है, लेकिन अफसर सुध नहीं ले रहे हैं। जिला कारागार की क्षमता बढ़ाने के विषय में सोचा तक नहीं गया है।
जिला कारागार को बने हुए 16 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। जिला कारागार में कुल सात अहाते बने हुए हैं, जिनमें से चार अहातों में चार-चार बैरकें बनी हुई हैं। यानी चार अहातों में कुल 16 बैरक बनी हैं। तीन अहातों में केवल दो-दो बैरक बनी हैं।
इस तरह कुल सात अहातों में 22 बैरक बनी हुई हैं। परिसर के अंदर ही एक महिला व एक बच्चा बैरक भी बनी हुई है। सभी बैरकों को मिला दिया जाए, तो कुल 24 बैरकें हैं। प्रत्येक बैरक की क्षमता 30 लोगों के रहने की है।
इस हिसाब से कुल 720 बंदियों और कैदियों को रखे जाने की क्षमता है, लेकिन यहां करीब 1800 बंदी/कैदी हैं। नए जिला कारागार का क्षेत्रफल सूबे की कई जेलों से काफी बड़ा है। अगर शासन स्तर से कार्रवाई की जाए, तो यहां बैरकों की संख्या में इजाफा किया जा सकता है।
12 से 14 घंटे सक्रिय रहता है जैमर, सीसीटीवी भी खराब
जिला जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल परिसर में छह जैमर लगे हुए हैं, लेकिन बिजली जाने पर यह काम नहीं करते हैं। जिला जेल में 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल पाती है। 24 घंटे जैमर चालू रखने के लिए सोलर पैनल लगाया जाना है, जो अभी तक नहीं लगा है। कारागार परिसर में 12 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, लेकिन इनमें से तीन खराब हैं।
आंकड़े
कुल संख्या 1800
किशोर 42
महिला 75
महिलाओं संग बच्चे 08
(1800 में ही किशार महिला और बच्चे शामिल हैं)
कोट...
जेल में करीब 840 बंदी-कैदियों की क्षमता है, जिसके सापेक्ष वर्तमान में 1800 बंदी-कैदी यहां हैं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है जल्द समाधान निकाला जाएगा।
- ओपी कटियार, जेल अधीक्षक, बुलंदशहर