34 साल बाद दो ठेकेदार दोषी करार
एफसीआई घोटाला प्रकरण : सरकार को लगाया था 5.45 लाख का चूना
सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला, सजा पर बहस आज
मुजफ्फ रनगर में 1984 में हुआ था घोटाला, तीसरे अभियुक्त की हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) की मुजफ्फरनगर ब्रांच में वर्ष 1984 में हुए घोटाले के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को दो ठेकेदारों को दोषी करार दिया। विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार झा की अदालत में बुधवार (आज) को सजा पर बहस होगी।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक नईम रजा ने बताया कि मुजफ्फरनगर के एफसीआई में खाद्य सामग्री की खरीद का बिल दिखाकर दो ठेकेदारों सुरेंद्र कुमार सिंघल और अमरनाथ ने पूर्व जिला मैनेजर केसी माथुर के साथ मिलकर घोटाला किया था। दोनों ठेकेदारों ने 1984 में गेहूं, चावल और चीनी का बिल पांच लाख 45 हजार रुपये का बिल दिखाकर समान खरीदा था। इसके बाद 1989 में दोनों ठेकेदारों पूर्व केसी माथुर के साथ मिलकर इसी बिल को दोबारा लगाकर सरकार को पांच लाख 45 हजार रुपये का नुकसान पहुंचाया था, जिसकी सूचना मिलने के बाद सीबीआई की देहरादून शाखा ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने 1992 में तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। नईम रजा ने बताया कि केस की सुनवाई के दौरान अभियुक्त केसी माथुर की 1995 में मौत हो गई थी। 34 वर्ष बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया है। बुधवार को सजा पर बहस होगी।