जीडीए की सख्ती काम नहीं आई, 7128 लोगों को नहीं मिला आशियाना
गाजियाबाद। योगी सरकार की कार्रवाई का डंडा बिल्डर्स की मनमानी के सामने हल्का पड़ रहा है। जीओएम का आदेश था कि 19965 लोगों को तय समय में घर दिया जाए। इसकी अंतिम तारीख भी आ गई लेकिन 7128 लोगों के घर का सपना अभी भी अधूरा है। 29 बिल्डरों के कान में जूं तक नहीं रेंगी। जीडीए ने छह बिल्डर्स पर एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करने तक सीमित रहे। 30 अप्रैल की डेडलाइन तक कब्जा दिलाने में जीडीए फेल हो गया है। विभाग बिल्डर्स पर नकेल नहीं कस पा रहा।
गाजियाबाद में बिल्डर्स की मनमानी जीडीए के सिर चढ़कर बोल रही है। बिल्डर्स को काबू में करने के लिए मंत्री समूह ने सख्त आदेश दिए थे। इन आदेशों की डेडलाइन खत्म होने के बावजूद गाजियाबाद के करीब 7128 लोगों के घर का सपना पूरा नहीं हो सका है। प्राधिकरण की ढिलाई का खामियाजा फ्लैट्स खरीदारों को भुगतना पड़ रहा है।
बिल्डर्स और खरीदाराें के विवादों के निपटारे के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में तीन मंत्रियों की कमेटी बनी थी। इसमें करीब 29 बिल्डर्स को अप्रैल के आखिर तक फ्लैट तैयार कर उनका कब्जा देने की समय सीमा निर्धारित की गई थी। जीडीए को इसमें नोडल एजेंसी बनाया गया था। लेकिन जीडीए की तमाम सख्ती के तमाम बायर्स को ही अपना आशियाना नहीं मिल सका है। 29 में से 18 बिल्डर्स को डिफॉल्टर श्रेणी में रखने के साथ जीडीए छह पर एफआईआर दर्ज करा चुका है। लेकिन अभी तक 7128 लोगाें को बिल्डरों की धोखाधड़ी झेलनी पड़ रही है। बीते दिनों कलक्ट्रेट में कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना शहर में थे, जब उनके समक्ष ये मुद्दा उठा तो जवाबदेही तो छोड़िए मंत्री जी प्रेस कांफ्रेेंस को बीच में ही छोड़कर चले गए थे।