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मुआवजे की जांच करेगी कमिटी

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मुआवजे की जांच करेगी कमेटी
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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे घोटाले के बाद अब ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के मुआवजे पर जांच की तलवार लटक गई है। डीएम रितु माहेश्वरी ने जांच के लिए एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है जो इस बात की जांच करेगी कि किसानों को दिए गए मुआवजे को लेकर दरों का निर्धारण नियमानुसार किया गया है या नहीं। हालांकि प्रशासन की तरफ से कहा जा रहा है कि ईस्टर्न पेरिफेरल के मुआवजे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। बस सिर्फ यह परखने के लिए जांच कराई जा रही है कि कहीं पर कोई त्रुटि तो नहीं हुई है।
प्रशासन की तरफ से गठित कमेटी में एडीएम प्रशासन के साथ ही एआईजी स्टांप, एसडीएम सदर और मोदीनगर को भी शामिल किया गया है। इससे साफ है कि कमेटी तत्कालीन सर्किल रेट से लेकर वर्तमान के मूल्यों का आंकलन करेगी, जिससे की यह पता लगाया जा सके कि कहीं पर मुआवजा निर्धारित दरों से अनुचित लाभ तो नहीं दिया गया है। ध्यान रहे कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत शहर क्षेत्र में सर्किल रेट का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र का चार गुना मुआवजा दिया जा सकता है। इसके साथ ही जमीन अधिग्रहण को लेकर जारी धारा-3 डी के नोटिफिकेशन से तीन साल पूर्व हुए बैनामों को आधार बनाकर किसान अधिक मुआवजे का दावा भी कर सकते हैं। ऐसे मामले आर्बिट्रेशन कोर्ट में जाते हैं, जिनकी सुनवाई डीएम व जिला जज की आर्बिट्रेशन कोर्ट में होती है। अब ईस्टर्न पेरिफेरल से जुड़ी जांच कमेटी में एआईजी स्टांप को भी शामिल किया गया है। ऐसे में जाहिर है कि हर बिंदु पर जांच की जाएगी। एडीएम प्रशासन ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे में मुआवजा नियमानुसार दिया गया है जिसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जांच कमेटी सिर्फ यह देखेगी कि कहां पर मुआवजा निर्धारण में कोई त्रुटि तो नहीं हो गई है।
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मौजूदा वक्त में जांच के मायने
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम दौर में है और अगले वर्ष से यातायात के लिए खोला जाना है। वहीं, जमीन अधिग्रहण से जुड़े तमाम विवाद खत्म हो चुका है। बस सिर्फ मुआवजे से जुड़ी कुछ फाइलें जिला जज के यहां लंबित हैं। ऐसे में जांच बैठके के पीछे कई सारी अटकलें लगाई जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि प्रशासन को गोपनीय जानकारी मिली है कि एडीएम भू-अर्जन कार्यालय ने मुआवजा निर्धारण करने में भारी खेल किया है। कुछ चुनिंदा लोगों को अनुचित लाभ पहुंचा गया है। दूसरे प्रशासन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे घोटाले को देखते हुए अपने स्तर पर भी ईस्टर्न पेरिफेरल से जुड़े जमीन अधिग्रहण व मुआवजे की दरों का जांच के जरिए ऑडिट करा लेना चाहता है क्योंकि मुआवजे के खेल में पूर्व डीएम विमल कुमार शर्मा और निधि केसरवानी फंस चुकी हैं। अब प्रशासन चाहता है कि दोबारा से ऐसी कोई गलती न हो। इसलिए जांच कमेटी के जरिए मुहर लगवा लेना चाहता है।
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