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सेठ आनंद राम जयपुरिया स्कू लप्रकरण

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सेठ आनंद राम जयपुरिया पब्लिक स्कूल प्रकरण
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गाजियाबाद। डीएम रितु माहेश्वरी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि जयपुरिया पब्लिक स्कूल प्रकरण में लंबी लड़ाई के बाद अभिभावकों की जीत हुई है। डीएम ने अपनी अधिकारिक ट्विटर एकाउंट पर लिखा है कि कोर्ट ने अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। डीएम के मुताबिक अब जयपुरिया स्कूल प्रबंधन को गाजियाबाद प्रशासन और डीएफआरसी के फीस संबंधी आदेशों का पालन करना होगा। उधर कोर्ट में अब इस मामले में 30 अप्रैल को अंतिम सुनवाई होगी।
फीस मामले में सेठ आनंद राम जयपुरिया स्कूल और अभिभावकों के बीच लड़ाई चल रही थी। डीएम रितु माहेश्वरी ने इसे संज्ञान में लिया और शासन को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि जयपुरिया मामले में सुनवाई जल्द से जल्द कराई जाए। शुक्रवार को हाईकोर्ट में कोर्ट संख्या 46 में मामले की सुनवाई हुई। डीएम के मुताबिक सुनवाई बाद कोर्ट ने जयपुरिया स्कूल प्रबंधन को आदेश दिए हैं कि वह फीस संबंधी मामले में डीएफआरसी के आदेशों का पालन करे। उधर, कोर्ट के इस आदेश से 49 छात्र-छात्राओं को राहत मिल गई है जिनकी स्कूल ने टीसी काट दी है। अब स्कूल प्रबंधन को इन छात्रों को प्रवेश देना पड़ेगा।
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दिनभर चला ड्रामा
शुक्रवार को कोर्ट में जब सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान अभिभावकों में यह खबर पहुंची की कोर्ट ने उनके हित में फैसला लिया है। दोपहर को अभिभावक स्कूल में बकाया फीस का चेक लेकर पहुंचे लेकिन स्कूल मैनेजमेंट ने अभिभावकों से चेक नहीं लिये। मैनेजमेंट ने कहा कि स्कूल में प्रिंसिपल नहीं है इसलिए वह चेक नहीं लेंगे।

यह है डीएफआरसी का आदेश
स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से एनुअल चार्ज, बिल्डिंग चार्ज और प्रतिवर्ष एडमिशन फीस नहीं लेगा। स्कूल प्रबंधन अधिकतम पांच से 10 प्रतिशत फीस बढ़ाएंगे तो उन्हें उस हिसाब से अपने खर्चों को भी बताना होगा। खासतौर से टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टॉफ की सैलरी को बताना होगा। स्कूल प्रबंधन 2017-18 की फीस अभिभावकों से लेंगे।
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जयपुरिया स्कूल की पांच बसों का कटा चालान
परिवहन विभाग ने जयपुरिया स्कूल की पांच बसों को चेक किया। एआरटीओ आरके सिंह ने बताया कि स्कूल की पांच बसाें में खामियां मिली। बसों में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं थे। वहीं स्कूल बस चालक के पास जो ड्राइविंग लाइसेंस मिला वह पांच वर्ष पुराना नहीं मिला। स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेज एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। इसके अलावा शहर में पांच अन्य बसों का चालान काटा गया है।
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