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पेंशन की जंग में जिंदगी भी हार गईं राजबाला

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पेंशन की जंग में जिंदगी भी हार गईं राजबाला
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गाजियाबाद। कैंसर पीड़िता राजबाला पेंशन की जंग में जिंदगी भी हार गई, लेकिन जिम्मेदार अफसरों का दिल नहीं पसीसा। विद्युत निगम में सेवाएं देने के बाद राजबाला ने पेंशन बनवाने के लिए विभागीय लेकर प्रशासन तक के अफसरों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने उसकी गुहार नहीं सुनी। अफसरों की संवेदनहीनता का नतीजा यह रहा कि इलाज के लिए पर्याप्त पैसा न होने के चलते राजबाला 27 अप्रैल की रात चल बसीं।
संजय नगर सेक्टर-23 के ई-ब्लॉक में रहने वाली राजबाला विद्युत निगम के पटेल नगर स्थित ऑफिस में चपरासी के पद से रिटायर्ड हुई थीं। राजबाला की बेटी निर्मल गोयल ने बताया कि उनकी मां 30 सितंबर 2017 को सेवानिवृत्त हुई थीं। बीते एक साल से वह ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही थीं, इसलिए पैसे की उन्हें सख्त जरूरत थी। इलाज के लिए बड़ी धनराशि की जरूरत थी। वह अक्सर यही कहती थी कि बस पेंशन बन जाए तो पीएफ व पेंशन की पैसा लेकर अपना इलाज करा लूंगी, लेकिन हर दफा अधिकारियों से आश्वासन ही मिलता रहा, लेकिन पेंशन कहीं नहीं लग पाई। 10 से अधिक बार लिखित में अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन विभाग ने उनकी एक न सुनी। आखिरकार 27 अप्रैल को इस बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई। बेटी का कहना है कि अगर विभाग समय से उनका पीएफ और पेंशन दे देता तो उनकी मां का इलाज हो सकता था।
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आखिरी पत्र में लिखा मौत के लिए विभाग जिम्मेदार
बेटी निर्मल ने बताया कि उनकी मां राजबाला ने मौत से महज एक सप्ताह पहले विभाग को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने साफ तौर पर लिखा कि वह कैंसर से पीड़ित हैं। अगर इस बीमारी के कारण उनकी मौत होती है तो इसके लिए विद्युत निगम जिम्मेदार होगा।

पिता की मौत के बाद ही मां ही थीं सहारा
बेटी ने बताया कि उनके पिता अमरीश की मौत 34 साल पहले हो गई थी। इसके बाद ही मां ही उनका सहारा थीं। उन्होंने बताया कि परिवार में दो भाई और दो बहन हैं। राजबाला ने ही दो बेटी चंचल और निर्मल व बेटे हिमेंद्र गुप्ता की शादी की, जबकि एक बेटा नगेंद्र अभी पढ़ाई कर रहा है। राजबाला ने ही अपनी मेहनत से सभी को पढ़ाया था।
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वर्जन
इस मामले की जानकारी नहीं है। अगर इस तरह की कोई घटना हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। अगर कोई अधिकारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सरकार ने कैंसर के लिए इलाज के लिए कई सरकारी अस्पताल खोले हुए हैं, जहां मुफ्त में इलाज होता है। - एके चौधरी, मुख्य अभियंता, विद्युत निगम
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