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पत्रावली में फेरबदल करने में फंसे चकबंदी के अधिकारी-Cordination

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पत्रावली में फेरबदल मामले में फंसे सुरेश सिंह यादव
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गाजियाबाद। कोर्ट के आदेश में फेरबदल कर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति घोषित किए जाने का मामला पांच साल बाद फिर से खुल गया है। मामले में शिकायत के बाद शासन ने सुरेश सिंह यादव अपर आयुक्त चकबंदी और हापुड़ में तैनात सहायक चकबंदी अधिकारी अनिरुद्ध यादव के खिलाफ जांच बैठा दी है। डीएम गाजियाबाद को आदेश दिया गया है कि जालसाजी से किए गए हस्ताक्षरों का सक्षम प्राधिकारी से मिलान कराकर जांच आख्या प्रस्तुत करें।
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मामला वर्ष 2015 से जुड़ा है, जिसमें एक सरकारी संपत्ति को लेकर र्हाईकोर्ट व निचली अदालत में वाद दाखिल किया गया। निचली अदालत ने मामला हाईकोर्ट में लंबित होने का हवाला देकर कोई भी निर्णय करने से इंकार कर दिया। अब शिकायतकर्ता ने शासन को लिखित में अवगत कराया कि निचली अदालत की तरफ से जारी आदेश में फेरबदल किया गया। न्यायालय के एक कर्मचारी के साथ फर्जी आदेश बनाया गया, जिसमें सरकारी जमीन निजी संपत्ति घोषित किए जाने की बाद कही गई। जब कोर्ट के आदेश पर पत्रावली तैयार होकर जीडीए के तत्कालीन वीसी संतोष यादव के पास पहुंची तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने पूरे मामले में जांच कराई तो फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, लेकिन बाद में आगे की कार्रवाई के नाम पर खेल कर दिया गया। अब आरोप लगाया कि सुरेश सिंह यादव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने आनन फानन में जांच कर रिपोर्ट भेजी दी, जिसमें अपने चहेते अधिकारियों व कर्मचारियों को बचा लिया। एडीएम प्रशासन जितेंद्र कुमार का कहना है कि मामले में शासन ने जांच रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद विस्तृत जांच कराई जा रही है।
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