‘जमाना’ से आया था लोनी में टॉकीज का जमाना
लोनी। 1985 तक लोनी में कोई सिनेमाहॉल नहीं था। लोग फिल्म देखने गाजियाबाद जाते थे। अधिकांश लोग दूरी ज्यादा होने पर वंचित रह जाते थे। तब तो नई फिल्म को दूरदर्शन पर आने में भी दशक तक लग जाता था। सिनेमा के प्रति बढ़ते आकर्षण को देखकर दिल्ली के फकीर चंद गुप्ता ने लोनी में सिनेमा हॉल खोलने का निर्णय लिया। फकीर चंद ने तीन मई 1985 में गाजियाबाद रोड स्थित मुस्तफाबाद कालोनी के पास लक्ष्मी पैलेस खोला था।
लक्ष्मी सिनेमा में लगने वाली पहली फिल्म राजेश खन्ना की ‘जमाना’ थी। फिल्म देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों में उत्साह के साथ-साथ दीवानापन भी था। तब लोग राजेश खन्ना के फैन हुआ करते थे। फकीर चंद गुप्ता ने तब के गाजियाबाद के नवरंग, उर्वशी, चौधरी और पवन जैसे सिनेमाघरों के डिजाइन को कॉपी कर लक्ष्मी पैलेस का डिजाइन बनवाया था। उस जमाने में लक्ष्मी पैलेस की बालकनी में लग्जरी सीटें हुआ करती थीं, जोकि उस समय बहुत कम देखने को मिलती थीं। डिजाइन और सीटों को लेकर यह सिनेमाहॉल कई वर्षों तक चर्चा में रहा। एक शो देखने के लिए तीन से पांच रुपये खर्च करने पड़ते थे। लोग दूर-दूर से बैल-बुग्गी, तांगा, ट्रैक्टरों और टट्टुओं पर बैठकर आया करते थे। फिल्मों का प्रिंट लेने चांदनी चौक जाना पड़ता था। प्रिंट के लिए एडवांस बुकिंग होती थी। हिट फिल्मों का प्रिंट लाने के लिए कई महीनों का इंतजार करना पड़ता था। फकीर चंद गुप्ता के देहांत के बाद कारोबार का जिम्मा उनके दो बेटों सुभाष चंद और भारत गुप्ता पर आ गया।
2014 में आया यूएफओ
रील से चलने वाले पुराने सिस्टम को बदलकर दोनों भाइयों ने दो अक्तूबर 2014 को लक्ष्मी पैलेस में यूएफओ सिस्टम लगवाया। यूएफओ सिस्टम के बाद लक्ष्मी पैलेस में पहली फिल्म रितिक रोशन की बैंग-बैंग थी। इस फिल्म के शो कई सप्ताह तक हाउसफुल रहे। लेकिन समय गुजरने के साथ दिल्ली एनसीआर में ज्यादा सुविधाओं वाले मल्टीप्लेक्स खुलने पर इन टॉकीज में फिल्म देखने वालों की कमी होने लगी। अब आलम यह है कि अच्छी मूवी भी कम दरों पर दिखाने के बावजूद लोग कम ही आ रहे हैं। जबकि मल्टीप्लेक्स में टिकटों के रेट दोगुने या उससे ज्यादा भी होते हैं। लक्ष्मी पैलेस में अभी भी 30-40 रुपये में टिकट आ जाता है। टॉकीज मालिकों को फिल्मों की टिकट बिक्री पर सरकार को 18 प्रतिशत जीएसटी भी देना पड़ता है।
लक्ष्मी पैलेस चला तो खोल लिए तीन और मूवी पैलेस
लक्ष्मी पैलेस से अच्छी कमाई होने पर फकीर चंद गुप्ता ने लोनी में कविता पैलेस, मीनाक्षी पैलेस और खोड़ा में न्यू कविता पैलेस खोल लिया था। उस जमाने में लोनी के तीनों मूवी पैलेसों में लोगों ने फिल्मों का खूब आनंद लिया। सुभाष चंद गुप्ता और भारत गुप्ता ने वक्त के साथ-साथ इन सिनेमाघरों में कई बदलाव किए। साउंड, डेकोरेशन से लेकर सिस्टम तक बदलवा दिए। इससे दर्शक बढे़ भी, लेकिन मल्टीप्लेक्सों के आने पर ये खाली रहने लगे।
गदर ने की थी बंपर कमाई
लक्ष्मी पैलेस के मैनेजर रिषिपाल ने बताया कि गदर यहां बहुत चली थी। कई सप्ताह तक शो हाउसफुल रहे थे। तब टिकट के लिए लंबी लाइन लगती थी। कभी-कभी तो पुलिस को भी बुलाना पड़ता था।