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सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे रणवीर के पिता

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सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे रणवीर के पिता
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साहिबाबाद। देहरादून में 2009 में हुई रणवीर एनकाउंटर मामले में मंगलवार को आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से रणवीर के परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है निचली अदालत ने फर्जी एनकाउंटर करने के आरोपी 18 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया था। ऐसे में अब किन आधारों पर सिर्फ सात लोगों को सजा हुई है। आदेश का अध्ययन करने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। गौरतलब है कि पूर्व सांसद व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस मामले में तत्कालीन उत्तराखंड की बीजेपी सरकार को घटना की निष्पक्ष जांच कराने को कहा था। इसके बाद ही प्रदेश सरकार ने यह मामला सीबीआई को हवाले किया था।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मंगलवार को शालीमार गार्डन स्थित आवास पर बात करते हुए मृतक रणवीर के पिता रविंद्रपाल सिंह ने कहा कि उन्हें कोर्ट के फैसले से निराशा हुई है। रणवीर को इंसाफ नहीं मिला है। अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने रणवीर एनकाउंटर की सुनवाई उत्तराखंड की जगह दिल्ली में कराने की मांग की थी। दिल्ली की निचली अदालत ने ट्रायल के बाद 18 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया था। आदेश के खिलाफ ही आरोपी उच्च न्यायालय गए। पूरे परिवार को उम्मीद थी कि सभी आरोपियों को सजा बरकरार रखी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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परिवार की बहुत चिंता करता था रणवीर
रणवीर के परिजनों का कहना है कि उनका बेटा एमबीए कर कुछ दिन नौकरी करने के बाद कारोबार करना चाहता था, जिससे परिवार की आर्थिक तरक्की हो सके। रणवीर भले ही घर में सबसे छोटा था, लेकिन उसे परिवार की चिंता थी। रणवीर की मां का कहना है कि बिना कसूर के उनके बेटे का पूरा शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया। इसका हिसाब कौन देगा। इतना बताते बताते वह फफक-फफक कर रोने लगीं।

मदर डेयरी बूथ से होता है गुजारा
रणवीर के पिता रविंद्र पाल फौज में थे। उन्होंने फौज में करीब 28 साल नौकरी की। 2002 में वह फौज से रिटायर हो गए। रिटायरमेंट मिलने के बाद उन्होंने मदर डेयरी का बूथ मिला। इसी बूथ से परिवार को गुजारा चलता है। मौजूदा समय लाजपत नगर में बूथ चलाते हैं।
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मीडिया से मिली थी एनकाउंटर की सूचना
रणवीर की हत्या की जानकारी सबसे पहले एक मीडिया कर्मी से मिली थी। रणवीर ने जब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया तो उसमें चाचा का पता दिया था। जब फर्जी एनकाउंटर में उसकी हत्या की गई, उस समय उसकी जेब में ड्राइविंग लाइसेंस था। मीडिया की मदद से परिजनों को मौत की जानकारी मिली। 2009 में जब रणवीर की हत्या हुई थी, उस समय परिवार इंदिरापुरम के नीति खंड में किराए के मकान में रहता था। यहां पर करीब 10 साल परिवार रहा। 2012 में उन्होंने शालीमार गार्डन में अपना मकान बनवा लिया।
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