इंजीनियर के फ्लैट से बच्ची को कराया मुक्त
मुरादनगर। श्रम विभाग की टीम ने शुक्रवार को मोरटा स्थित मिडॉस विस्टा सोसायटी में एक इंजीनियर के फ्लैट पर छापा मारकर घरेलू कामकाज के लिए रखी गई 12 साल की बच्ची को मुक्त कराया। एसडीएम डॉ. अमित पाल के नेतृत्व में बाल श्रम को रोकने के लिए चलाए गए अभियान के तहत कार्रवाई की गई। गोपनीय सूचना के आधार पर बच्ची को मुक्त कराने पहुंची श्रम विभाग की टीम का सोसायटी के लोगों ने विरोध किया, जिस पर डिप्टी लेबर कमिश्नर पंकज राणा ने मौके पर पहुंच कर लोगों को समझाया। उन्होंने कहा कि बच्ची को मुक्त कराने के लिए सारे कानूनी अधिकारी हमारे पास हैं। अगर आप लोग विरोध करते हैं तो आपके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद बच्ची को मुक्त कराकर चाइल्ड लाइन के आश्रयस्थल भेजा गया है। उससे पहले बच्ची का मेडिकल भी कराया गया।
डिप्टी लेबर कमिश्नर ने बताया है कि मिडॉस विस्टा सोसायटी में सॉफ्टवेयर एक इंजीनियर अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी भी नेशनल बैंक में कार्यरत हैं। ऐसे में आठ साल के बच्चे की देखभाल के लिए 12 साल की बच्ची को रखा गया था जो मूल रूप से बिहार निवासी है। सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम सिंह ने बताया कि डेढ़ माह पहले दिल्ली के बाल आयोग को गुप्त सूचना मिली थी कि मोरटा स्थित मिडॉस विस्टा सोसायटी के एक फ्लैट में बिहार की बच्ची (12) से जबरन घरेलू कामकाज कराया जा रहा है। बीच में चुनाव होने के कारण पुलिस फोर्स न मिलने पर छापामारी नहीं हो सकी थी। शुक्रवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारी सुरेंद्र राकेश ने पुलिस फोर्स के साथ मिडॉस विस्टा सोसायटी के एक फ्लैट पर छापा मारकर बच्ची को मुक्त कराया। आरोप है कि बच्ची को भूखा प्यासा भी रखा जाता था। श्रम विभाग की टीम ने बच्ची का मेडिकल कराकर चाइल्ड हेल्प लाइन को सौंप दिया है।
चौराहों पर मारा छापा
गाजियाबाद। बाल श्रम को रोकने को लिए शुक्रवार को एसडीएम सदर डॉ. अमित पाल और डिप्टी लेबर कमिश्नर पंकज राणा के साथ ही जिला प्रोबेशन विभाग की टीम ने छापामारी की। सबसे पहले हापुड़ चुंगी पर छापेमारी कर दो बच्चों को पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि इन बच्चों के पुनर्वास का काम जिला प्रोबेशन विभाग को सौंपा गया है। उधर पहले दिन की छापामारी के बाद स्पष्ट संकेत मिले हैं कि बाल श्रम में लगाई गए बच्चे के पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है। क्योंकि शुक्रवार को जैसे ही हापुड़ चुंगी पर छापा पड़ा तो उसके बाद टीम राजनगर एक्सटेंशन, पुराना बस अड्डा व चौधरी मोड़ पहुंची लेकिन किसी भी जगह पर कोई बच्चा नहीं मिला। इससे साफ हो चला है कि भीख मंगवाने के काम में लगाए गए बच्चों के पीछे कोई गिरोह काम कर रहा है, जिसे एक जगह छापा पड़ने के बाद तत्काल पता चल गया।