दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल सख्त हो रहा है। एनजीटी की ओर से सीएनजी वाहनों को सड़क पर उतारने के लिए जोर दिया जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की तरफ से सीएनजी बसों को बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही एनजीटी ने दिल्ली से सटे राज्यों से पूछा है कि वे सीएनजी बसें क्यों नहीं चला सकते हैं।
जुलाई 2017 में रोडवेज की 15 सीएनजी बसों की समय सीमा समाप्त होने जा रही है जबकि जुलाई 2016 में भी 15 बसों की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। जुलाई 2017 में अब सिर्फ 62 सीएनजी बसें ही रह जाएंगी, इनके बदले नई बसें नहीं आ रही हैं। कुछ दिन पहले एनजीटी ने दिल्ली से सटे राज्यों से जानकारी मांगी थी कि वह अपने राज्यों में सीएनजी बसें क्यों नहीं चला सकते हैं।
अगर एनजीटी ने एनसीआर में सीएनजी बसों का संचालन करने के निर्देश दिए तो उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की मुसीबत बढ़ जाएगी। रोडवेज की हापुड़, मेरठ, नोएडा आदि रूटों पर करीब 77 सीएनजी बसें चल रही हैं, जो छह महीने बाद 62 रह जाएंगी लेकिन नई सीएनजी बसें खरीदने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
एआरएम एनपी वर्मा ने जुलाई 2017 तक 15 बसें समय सीमा पूरी कर लेंगी। यह बसें नौ लाख किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं, इन्हें हटाए जाने के बाद नीलाम कर दिया जाएगा।