गाजियाबाद। अस्पताल में प्रसव कराने के बाद भी जिले की 1189 महिलाएं जननी सुरक्षा योजना की एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के लिए भटक रही हैं। किसी महिला के खाते की केवाईसी पूरी नहीं है तो किसी की डिटेल ही पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सकी है। अस्पतालों में स्टाफ की कमी और प्रसव के समय लाभार्थियों का पूरा विवरण दर्ज नहीं किए जाने से भुगतान की प्रक्रिया अटक गई है। मामले की समीक्षा में स्थिति सामने आने पर डीएम ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और सभी पात्र महिलाओं के खातों में जल्द राशि पहुंचाने के निर्देश दिए।
जिले में अप्रैल से आठ सितंबर तक कुल 8960 महिलाओं के प्रसव अस्पतालों में कराए गए। इनमें से 6879 महिलाओं के खातों में जननी सुरक्षा योजना के तहत एक-एक हजार रुपये की राशि भेजी जा चुकी है। वहीं, 499 महिलाओं के बैंक खातों की केवाईसी पूरी नहीं होने के कारण भुगतान अटका है। इसके अलावा 393 महिलाओं की जानकारी पोर्टल पर दिखाई ही नहीं दे रही है। इस तरह कुल 1189 महिलाएं अभी योजना के लाभ से वंचित हैं।
भुगतान के लिए महिलाएं प्रसव के बाद अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं। कई लाभार्थी अस्पताल में बाबू और संबंधित कर्मचारियों से संपर्क कर चुकी हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। अधिकारियों के अनुसार अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी के कारण लाभार्थियों का विवरण तैयार करने, दस्तावेजों की जांच और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में देरी हो रही है। कई मामलों में भर्ती के समय भी महिलाओं की पूरी जानकारी दर्ज नहीं हो पाती है, जिससे बाद में भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है।
समीक्षा बैठक में डीएम ने लंबित लाभार्थियों का पूरा विवरण मांगा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की जानकारी तत्काल दुरुस्त कराकर उनके खातों में योजना की धनराशि भेजी जाए। साथ ही जिन महिलाओं के खाते से संबंधित औपचारिकताएं पूरी नहीं हैं, उन्हें भी जल्द पूरा कराने को कहा गया है।
अस्पताल में बैठेगा बैंककर्मी
नोडल अधिकारी जितेंद्र कुमार राव ने बताया कि लंबित सभी महिलाओं का विवरण जुटाया जा रहा है। जल्द से जल्द उनके खातों में योजना की राशि भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अस्पताल में बैंक का एक कर्मचारी भी बैठाया जाएगा, ताकि जिन महिलाओं का बैंक खाता नहीं है, उनकी बैंक संबंधी जानकारी तत्काल दर्ज कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।