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112 वर्ग मीटर पर बनती रहेंगी चार मंजिला बिल्डिंग

Tue, 27 Sep 2016 10:55 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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जीडीए - फोटो : अमर उजाला
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जीडीए की 146 वीं बोर्ड बैठक में नए बिल्डिंग बायलॉज 2016 को लागू कर दिया गया लेकिन पुराने बिल्डिंग बायलॉज 2014 को भी अमल में रहने दिया। दोनों बायलॉज आपस में टकरा न जाएं, इसका भी रास्ता चालाकी से निकाल लिया गया।

दरअसल बिल्डरों ने पुराने बायलॉज को लागू रहने देने के लिए जमकर लॉबिंग की थी और बोर्ड बैठक में पुराने बायलॉज पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई।जीडीए वीसी विजय यादव ने बताया कि नए बिल्डिंग बायलॉज को मंजूरी दे दी गई है लेकिन पुराने बिल्डिंग बायलॉज में कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
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जानकारी हो कि नए बायलॉज में 150 वर्गमीटर से 300 वर्गमीटर जमीन पर स्टिल्ट प्लस तीन मंजिल और पुराने बायलॉज में 112 वर्गमीटर से 2000 वर्गमीटर पर स्टिल्ट प्लस चार मंजिल बनाने का प्रावधान है। ऐसे में दोनों बायलॉज कैसे लागू हो सकते हैं।

इस पर वीसी ने कहा कि पुराने बायलॉज के नियमों के अलावा नए बायलॉज में जो अच्छी या नई चीजें होंगी, उन्हें अपना लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पुराना बायलॉज (अध्याय-27) 2014 को सिर्फ गाजियाबाद के लिए बनाया गया था इसलिए उसे यथावत रहने दिया गया है।

2011 के बायलॉज को संशोधित करके नए बायलॉज (अध्याय-26) को पूरे प्रदेश के लिए बनाया गया है। बोर्ड बैठक में प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने कहा कि अध्याय-27 को लागू रहने देने से मध्यवर्गीय लोगों को सस्ते में आवास उपलब्ध होंगे इसलिए इसे अपने स्वरूप में रहने दिया जाए। इस पर तुरंत सहमति बन गई।

याद हो कि करीब दो महीने पहले जब नए बिल्डिंग बायलॉज को लागू करने का शासनादेश आया था तब जीडीए के अधिकारियों ने इसे अंगीकार कर लेने का दावा किया था। उन्होंने ये तर्क दिए थे कि नए बिल्डिंग बायलॉज लागू होने से इलाके में संकीर्णता, जाम, सीवर-पानी की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। मंगलवार को अधिकारियों के सुर बदल गए थे।

उनका कहना था कि नया बिल्डिंग बायलॉज तो लागू हो ही गया, बाकी पुराने बायलॉज के लागू रहने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फायदा मिलेगा।उधर, गाजियाबाद बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने पुराने बायलॉज को लागू रहने देने के लिए प्रमुख सचिव आवास और जीडीए अधिकारियों को आभार जताया है।

शहर में करीब सौ से अधिक ऐसे बिल्डर हैं, जो पुराने बायलॉज के अनुसार शहर के नौ इलाकों में हजारों भवन बना रहे हैं।मेडिकल कॉलेज के लिए मेरठ की जमीन भी ‘पास’ मोदीनगर में एक निजी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के तीन वर्षों से फंसे मामले का मजेदार ढंग से हल निकाल लिया गया।

इस बारे में प्रदेश के चीफ टाउन एंड कंट्री प्लानर व बोर्ड बैठक के मेंबर अजय मिश्रा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 25 एकड़ जमीन का 70 प्रतिशत हिस्सा गाजियाबाद और 30 प्रतिशत हिस्सा मेरठ में आता है। ऐसे में समस्या उठ गई कि इसका नक्शा कौन पास करेगा।

फिर यह हल निकाला गया कि अधिक हिस्सा गाजियाबाद में आता है इसलिए जीडीए इसे पास करेगा। इस कॉलेज के लिए जमीन संस्थागत हरित क्षेत्र में आती है, जिसे संस्थागत सामान्य क्षेत्र में परिवर्तित करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। उन्होंने बताया कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने केलिए ऐसा किया गया।

डेयरी फार्म को कैटिल कालोनी में बसाया जाएगा
जीडीए वीसी ने बताया कि शहर में घनी आबादी में मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है। मवेशियों के सड़कों पर घूमने से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इस समस्या से निजात पाने केलिए डेयरी फार्मों केलिए कैटिल कॉलोनियां बसाई जाएंगी, जहां मवेशी के साथ उनके स्वामी भी रह सकें।

उन्होंने बताया कि इसके लिए कृषि योग्य भूमि तलाशी जाएगी। फिलहाल एक कमेटी बनाई गई है जो तीन जगहों पर इन कॉलोनियों के लिए सस्ती, ग्राम समाज की भूमि का चयन करेगी।

चौकीदारा शुल्क माफ
वाल्मिकी अंबेडकर मलीन बस्ती (डूडा) बेम्बे योजना नंदग्राम के अंतर्गत निम्न आय वर्ग के आवंटियों को भवन आवंटित किए गए हैं। इनके आवंटियों को चौकीदारा शुल्क माफ कर दिया गया है।

मास्टर प्लान 2041 की तैयारी
मास्टर प्लान 2041 की तैयारी अभी से शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। वीसी ने बताया कि अब विकास हाईटेक तरीके से हो रहा है। इसकेप्लान में काफी समय लगता है इसलिए मास्टर प्लान 2041 की तैयारी अब शुरू कर दी जाएगी।

31 मार्च तक दर रहेगी फ्रीज
वीसी ने बताया कि जीडीए की करीब एक हजार रुपये मूल्य की संपत्ति की नीलामी नहीं हो पा रही है। रियल एस्टेट में मंदी को देखते हुए इनकी दरों को 30 सितंबर तक केलिए फ्रीज की गई थी, जिसकी तारीख अब 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दी गई है।

बिना कटौती किए पैसा लौटाएगा जीडीए
जीडीए ने नवंबर 14 में इंदिरापुरम बहुमंजिले आवासीय योजना के तहत न्यायखंड प्रथम में भवन के लिए आवेदन आमंत्रित किया था। अब इसकी जगह बदल गई है। अब इंदिरापुरम विस्तार योजना के भूखंड संख्या जी-7 पर भवन बनाए जाएंगे। जो न्यायखंड प्रथम के आवंटी हैं, वे अगर उक्त नई जगह पर भवन नहीं लेना चाहते हैं तो उन्हें उनकी राशि बिना कटौती व ब्याज के वापस कर दी जाएगी।
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क्लब का लैंडयूज चेंज
राजनगर में एक निर्माणाधीन क्लब का लैंडयूज चेंज करके ग्रीन बेल्ट से पार्क कर दिया गया है। बताया गया कि 1962 के मास्टर प्लान में यह जमीन पार्क के लिए दर्शायी गई थी, गलती से पार्क की जगह ग्रीन बेल्ट लिख दिया गया था।
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