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मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे की जांच में नपेंगे अधिकारी

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मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे मामले में अफसरों पर लटकी तलवार
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मेरठ - दिल्ली एक्सप्रेस - वे पर गाड़ियों के रफ्तार भरने से पहले कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। जमीन अधिग्रहण के बदले भारी मुआवजा दिए जाने के मामले में मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने दो स्तरीय जांच शुरू करा दी है। अपर आयुक्त मेरठ मंडल पहले से जांच कर रहे हैं, इसी बीच जिलाधिकारी गाजियाबाद को भी जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। मंडलायुक्त के निर्देश पर जिला स्तर पर भी जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। मामला करोड़ों रुपये से जुड़ा है इसलिए जमीन अधिग्रहण और वित्तीय मामले की अलग-अलग जांच कराई जा रही है।
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विभागीय सूत्र बताते हैं कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले में कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती हैं। खासकर जो उस वक्त किसानों को मुआवजा बांटने में लगे थे। मंडलायुक्त मामले में कोई भी कार्रवाई करने से पहले हर पहलू से जांच करा लेना चाहते हैं। इसलिए डीएम गाजियाबाद को भी अपने स्तर से जांच करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस सारे मामले की करीब 500 से अधिक फाइलें मंडलायुक्त कार्यालय पहले ही तलब कर चुका है। मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस - वे के लिए जमीन अधिग्रहण का पहला नोटिस 8 अगस्त 2011 को जारी हुआ था, जिसमें जिले की 18 गांवों की जमीन को चिन्हित किया गया। नोटिफिकेशन होने के कई साल बाद तक जमीन अधिग्रहण नहीं हुआ। इस बीच जिन किसानों की जमीन को एक्सप्रेस-वे के लिए चिन्हित किया गया, उन्होंने अपनी जमीनें दूसरे किसानों को ऊंची कीमतों पर बेच दी। इसके बाद इन्हीं बैनामों को आधार मानकर जिला प्रशासन ने चार गुना मुआवजा बांट दिया गया। जबकि नियम कहता है कि नोटिफिकेशन जारी होने की तिथि से तीन वर्ष पहले की अवधि में सबसे अधिक कीमत वाले 50 फीसदी बैनामों का औसत निकलकर मुआवजा दिया जाना चाहिए। नाहल और कुशलिया गांव का मामला पकड़ में आने के बाद मंडलायुक्त ने पूरे एक्सप्रेस वे के जमीन अधिग्रहण की जांच शुरू कराई है। अब तक जिले में एक्सप्रेस- वे के लिए चिन्हित 268.80 हेक्टेयर भूमि में से 266.50 हेक्टेयर का अधिग्रहण किया जा चुका है जिसके बदले 3672 किसानों को 442.75 करोड़ रुपया का मुआवजा दिया जा चुका है।
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