स्वाट टीम ने गिरफ्तार किए हेल्थ सर्विस का झांसा देकर विदेशियों से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य।
गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक के ऑर्बिट प्लाजा में कॉल सेंटर संचालित कर विदेशी नागरिकों से स्वास्थ्य सेवा के नाम पर उनकी डिटेल लेने के बाद उसे बेचने वाले गिरोह के 11 बदमाशों को स्वॉट टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।
ठग विभिन्न तरीके से विदेशी नागरिकों की बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधित जानकारी लेने के बाद उसे विदेशी ठगों को बेचते थे। गैंग बीमार और धनाड्य विदेशियों का डाटा जुटाता था। डाटा देने के बदले प्रति व्यक्ति उन्हें 200 से 300 डॉलर मिलते थे।
एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि 2011 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स अंग्रेजी की पढ़ाई करने वाले मनीष मिश्रा ने 2018 में कंपनी शुरू की थी। वह अपने अमेरिका में बैठे साथियों की मदद से यह पूरा नेटवर्क चला रहा था। मनीष समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर मौके से 25 डेस्कटॉप, 25 हेडफोन, कार, नकदी आदि बरामद किए गए हैं। इस गिरोह में शामिल तीन युवतियों सहित 14 आरोपी अभी भी पुलिस पकड़ से बाहर हैं। ऑफिस को एक सॉफ्टवेयर कंपनी के नाम से 2021 में नेशनल कंप्यूटर एकेडमी (एनसीए) में रजिस्टर्ड कराया गया। आरोपियों ने सेंटर के बाहर यूनिहेल्थ केयर सर्विसेज प्रा. लि. का बोर्ड लगा रखा था।
वीसी डायलर सॉफ्टवेयर के जरिए कॉल कर अमेरिकी नागरिकों को यह स्वास्थ्य संबंधी कंपनी से जुड़ा हुआ बताते थे। वे उन्हें कई प्रकार के ऑफर की जानकारी देते थे और जो लोग झांसे में आते थे उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाई जाती थी। यह डाटा मनीष अपने अमेरिका में रह रहे साले निखिल व साथी जैक और टोनी की मदद से विभिन्न कंपनियों को भेज देता था।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि डाटा मिलने पर हर दिन 25 लाइन से लगभग 20-20 कॉल होती थीं। पूरा कॉल सेंटर प्रतिदिन 500 कॉल करता था। इनमें से 10-15 लोगों की जानकारी मिल जाती थी।
नागालैंड की युवती देती थी प्रशिक्षण
कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को कॉल करने के लिए गैंग के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाता था। इसकी मैनेजर रुचिता और आईटी विभाग के अजय यादव बातचीत की स्क्रिप्ट तैयार करते थे। नागालैंड की रिंगमाइका और सूजल त्यागी कॉल सेंटर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देते थे, जिसमें बातचीत का तरीका सिखाया जाता था।