दिल्ली से मेरठ रोड मननधाम तक होगी सीधी कनेक्टिविटी
गाजियाबाद। दिल्ली से मेरठ और हरिद्वार जाने वाले लोग अब बगैर जाम का झाम झेले 20 मिनट में दिल्ली-मेरठ हाइवे पर मननधाम तक पहुंच सकेंगे। जीडीए ने राजनगर एक्सटेंशन को सीधे दिल्ली-मेरठ हाईवे पर मोरटा के पास मननधाम तक जोड़ने वाले बाइपास पर काम शुरू कर दिया है। प्राधिकरण की ओर से बाइपास के लिए नूरनगर तक भूमि अधिग्रहरण कर 45 मिटर चौड़ी सड़क बनाई जा चुकी है। बाईपास के निर्माण के रास्ते में आने वाली मोरटा व सिकरोड़ की जमीन की खरीद प्रक्रिया जीडीए ने शुरू कर दी है।
किसानों से जमीन खरीद के लिए जीडीए ने मोरटा व सिकरोड़ गांव के लोगों को आगामी सोेमवार को बुलाया है। जीडीए अधिकारी मामले का हल निकलने की संभावना जता रहे हैं। जीडीए राजनगर एक्सटेंशन के अंदर और चौराहों पर जाम की समस्या को खत्म करने के लिए राजनगर एक्सटेंशन से सटा नूरनगर, सिकरोड़ होते हुए मोरटा मननधाम तक करीब पांच किमी लंबा बाईपास का निर्माण कर रहा है। बाईपास निर्माण के लिए प्राधिकरण की ओर से नूरनगर तक जमीन अधिग्रहित कर 45 मीटर चौड़ी रोड बना दी गई है। रोड के रास्ते में पड़ने वाली अगर कुछ जमीन जीडीए को मिल जाती है तो मुख्य बाधा खत्म हो जाएगी।
हल्के वाहनों के लिए होगा बाईपास
राजनगर एक्सटेंशन से सटकर नूरनगर से दिल्ली-मेरठ हाइवे पर मननधाम पर निकलने वाले इस बाईपास पर केवल हल्के वाहनों को निकलने की अनुमति होगी। इस बाईपास पर भारी वाहन नहीं जा सकें, इसलिए दोनों एंट्री प्वाइंट पर नीचे बैरियर लगाए जाएंगे। बाईपास रोड बनने के बाद हल्के वाहन दिल्ली यूपीगेट, एलिवेटेड रोड से होते हुए बाईपास से सीधे दिल्ली-मेरठ रोड स्थित मोरटा मननधाम तक पहुंचेंगे।
मोहननगर, मेरठ तिराहे व राजनगर एक्सटेंशन पर नहीं लगेगा जाम
जीडीए द्वारा बनाए जा रहे बाईपास से विभिन्न मार्गों पर जाम की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। अभी यूपी गेट व दिल्ली से आने वाला ट्रैफिक मोहननगर, जीटी रोड, मेरठ तिराहा, राजनगर एक्सटेंशन की अंदरूनी चौराहों के साथ दिल्ली-मेरठ रोड पर बने राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से होकर गुजरता है। वाहनों की बड़ी संख्या होने से सुबह-शाम जाम की समस्या भी होती है। इस बाईपास के बनने से इन सड़कों का जाम काफी हद तक खत्म हो जाएगा।
सर्किल रेट बना मुख्य बाधा
राजनगर एक्सटेंशन से नूरनगर, मोरटा तक बनने वाले बाईपास के निर्माण में मुख्य बाधा सर्किल रेट बना हुआ है। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक यहां एक गांव का सर्किल रेट तीन गुना से अधिक, और जिस गांव में जीडीए को जमीन खरीदनी है, वहां का सर्किल रेट बहुत कम है। कम सर्किल रेट पर किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है। किसान बगल वाले गांव का सर्किल रेट देने की मांग कर रहे हैं। अब जीडीए किसानों से बातचीत कर मामला सुझलाने का प्रयास कर रहा है।