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एमएमजी अस्पताल में युवक की मौत पर हंगामा

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एमएमजी अस्पताल में युवक की मौत पर हंगामा
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत पर हंगामा हो गया। डॉक्टर के मुताबिक भूरे टीबी का मरीज था। इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगाकर तीमारदार फार्मेसिस्ट से भिड़ गए। एक तीमारदार ने फार्मेसिस्ट का कॉलर पकड़कर हाथापाई की। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर पोस्टमार्टम कराने की बात की तो तीमारदार शव लेकर चले गए। घटना से फार्मेसिस्टों में आक्रोश है। हालांकि मामले में किसी की भी ओर से पुलिस से शिकायत नहीं की गई है।
बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में डॉ. वीके मिश्रा और फार्मेसिस्ट बृजेश कुमार की ड्यूटी थी। इसी दौरान कैला भट्ठा के रहने वाले कुछ लोग भूरे (19) नाम के युवक को लेकर अस्पताल आ गए। भूरे की हालत गंभीर थी। डॉ. वीके मिश्रा ने भूरे को देखने के बाद उसे आक्सीजन दिलानी शुरू कर दी और फार्मेसिस्ट से एक इंजेक्शन भी लगवा दिया। इसके बाद भी भूरे की हालत में सुधार नहीं दिखा तो डॉक्टर ने उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल, दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। भूरे का भाई और उसके मोहल्ले को लोग जैसे ही उसे एमएमजी से बाहर ले जाने लगे, फार्मेसिस्ट ने आक्सीजन सिलेंडर हटा लिया। जीटीबी के बजाए तीमारदार भूरे को लेकर जिला क्षय रोग विभाग ले जाने लगे। रास्ते में ही भूरे की सांस थम गईं। उसकी मौत के बाद तीमारदार शव को फिर से एमएमजी अस्पताल ले आए और यहां उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। तीमारदारों का गुस्सा देखते ही डॉक्टर तो इमरजेंसी से चले गए। तीमारदार फार्मेसिस्ट से भिड़ गए। फार्मेसिस्टों ने इसका विरोध किया तो एक तीमारदार ने उनका कॉलर पकड़कर हाथापाई कर दी। इसी बीच पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने तीमारदारों से शव का पोस्टमार्टम कराने को कहा तो वह राजी नहीं हुए। वे शव लेकर चले गए। घटना के बाद फार्मेसिस्टों ने सीएमएस को फोन कर घटना की जानकारी दी। साथ ही अस्पताल में सुरक्षा को पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगवाने की मांग भी की। फार्मेसिस्ट बृजेश कुमार का कहना है कि भूरे को टीबी के साथ सेफ्टीसीमिया भी था। तीमारदार उसे लेकर जा रहे थे। इसी बीच उसकी मौत हो गई। तीमारदारों ने वापस आकर उससे हाथापाई की।
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आक्सीजन सिलेंडर हटाने से हुई मौत!
भूरे के तीमारदारों का आरोप है किभूरे की हालत बेहद खराब थी। एमएमजी अस्पताल में उसका सही से इलाज ही नहीं किया गया। रेफर करने के बाद अचानक भरे को लगी आक्सीजन हटा दी गई। शायद इसीलिए रास्ते में उसकी मौत हो गई।

किराए पर रहता था भूरे
एमएमजी अस्पताल में मरने वाला भूरे कैला भट्टा में किराए के मकान में रहकर मजदूरी करता था। आसपास के लोगों ने उसकी हालत खराब होने पर छोटे भाई को बुलाया था। उसके साथ आसपास के लोग ही एमएमजी अस्पताल लेकर आए थे।
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मैं एनेस्थेटिक डॉक्टर हूं। बृहस्पतिवार को इमरजेंसी में ड्यूटी लगी थी। इसी बीच कुछ लोग भूरे को लेकर आए। टीबी की वजह से उसके दोनों फेफड़े खराब हो चुके थे। हमने प्राथमिक उपचार दिलाकर उसे जीटीबी अस्पताल रेफर किया था। अस्पताल से निकलते ही उसकी मौत हो गई और परिवार वाले बदतमीजी करने लगे। - डॉ. वीके मिश्रा
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