गाजियाबाद 27 अक्तूबर को देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। शहर का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में 324 दर्ज किया गया। लोग घरों में और घर के बाहर मॉस्क लगा के आवाजाही कर रहे हैं। हवा बेहद खराब होने से लोगों के गले में खरास, आंखों में जलन की शिकायत आ रही है।
गाजियाबाद रविवार को देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। शहर का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में 324 दर्ज किया गया, जबकि दो दिन पहले 23 और 24 अक्तूबर को क्रमश: 305 और 272 एक्यूआई के साथ गाजियाबाद देश के तीसरे सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हुआ था। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू होने के बावजूद भी संबंधित विभागों द्वारा प्रदूषण के रोकथाम पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है।
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रोजाना जनपद के विभिन्न इलाकों में कूड़ा जलना, पानी का छिड़काव नहीं कराना, सड़क किनारे धूल की सफाई नहीं होना, जगह-जगह वाहनों का जाम और वाहनों से निकलने वाले धुंए, निर्माणाधीन मकानों पर रोक नहीं प्रदूषण के मुख्य कारण माने जा रहे है। जबकि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्रा का कहना है कि मौसम में बदलाव होने की वजह से एक्यूआई में उतार-चढ़ाव हो रहा है। कभी हापुड़, ग्रेटर नोएडा तो कभी गाजियाबाद का एक्यूआई बढ़ रहा है। मौसम स्थिर होने के बाद एक्यूआई सामान्य हो जाएगा।
रविवार सुबह से ही गाजियाबाद की हवा जहरीली हो गई। 10 बजे लोनी स्टेशन का एक्यूआई गंभीर श्रेणी में 412 तक पहुंच गया, जबकि अन्य तीन स्टेशन इंदिरापुरम, वसुंधरा और संजयनगर का एक्यूआई भी 400 के करीब पहुंच गए। दोपहर से शाम होने तक शहर के एक्यूआई में थोड़ी गिरावट हुई। इसके बावजूद भी शहर की हवा लोगों के लिए साफ नहीं हो सकी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा शाम चार बजे जारी 253 शहरों की सूची में गाजियाबाद देश में दिल्ली के बाद दूसरा सबसे प्रदूषित शहर दर्ज हुआ।
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वहीं, हवा में धूल के सूक्ष्म कण(पीएम10) और धूल के अति सूक्ष्म कण (पीएम2.5) का दिनभर में न्यूनतम स्तर भी बेहद खराब श्रेणी में 247 एवं 328 दर्ज किया गया। जिससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग, युवा और बच्चों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग घरों में और घर के बाहर मॉस्क लगा के आवाजाही कर रहे हैं। हवा बेहद खराब होने से लोगों के गले में खरास, आंखों में जलन की शिकायत आ रही है।