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मर गई संवेदनाएं, अंतिम संस्कार को 30 घंटे विद्युत शवदाह गृह पड़ा रहा उद्यमी का अधजला शव

Thu, 18 Jun 2020 02:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

- कोरोना से मृत उद्यमी के अंतिम संस्कार के दौरान खराब हुआ विद्युत शवदाह गृह
- इलेक्ट्रिक पार्ट्स मंगाने और शवदाह गृह ठीक कराने में लग गए 29 घंटे
- अफसरों की संवेदनाएं भी हुई खत्म, कोरोना संक्रमित शवों के लिए नहीं की व्यवस्था
- 16 दिन में तीन बार खराब हो चुका विद्युत शवदाह गृह 
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उद्यमी का शव ले जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण की भयावहता बढ़ी तो मरीजों के साथ-साथ अफसरों की संवेदनाएं भी मरने लगी हैं। कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद एक नामी उद्यमी का शव अंतिम संस्कार के इंतजार में दो दिन तक अधजली हालत में पड़ा रहा। अंतिम संस्कार के दौरान विद्युत शवदाह गृह खराब हो गया। इस विद्युत शवदाह गृह को दोबारा चालू करने में 30 घंटे से ज्यादा का समय लग गया तब तक मृतक उद्यमी के परिजन अस्थियां लेने का इंतजार करते रहे। 
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उद्यमी का शव - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली स्थित वायर बनाने की फैक्ट्री के मालिक इंदिरापुरम की एटीएस सोसायटी में रहते थे। उद्यमी की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन इलाज के बाद सोमवार शाम उनका निधन हो गया। अस्पताल की ओर से दस्तावेजी कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे शव को अंतिम संस्कार के लिए हिंडन मोक्ष स्थली ले जाया गया। यहां विद्युत शवदाह गृह में उद्यमी के शव को अंतिम संस्कार के लिए रखा गया। कुछ देर बाद ही इस शवदाह गृह में तकनीकी खराबी आ गई। अभी शव पूरी तरह नहीं जल पाया था। इसके बाद निगम कर्मचारी शवदाह गृह का ताला लगाकर घर चले गए। बुधवार सुबह परिजन अस्थियां लेने पहुंचे तो उन्हें नहीं मिली।
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : जी पाल
मृतक के रिश्तेदार ने राज्यसभा सांसद से शिकायत की तो उन्होंने फोन कर निगम अधिकारियों से बात की। उनके फोन करने पर आनन-फानन में निगम अधिकारी मौके पर पहुंचे और खराब हुए विद्युत शवदाह गृह के पार्ट्स को बदलवाने का काम शुरू किया गया। शाम करीब चार बजे शवदाह गृह ठीक हो पाया और इसके बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों का कहना है कि अब गुरुवार को अस्थि विसर्जन हुआ। 

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सांकेतिक - फोटो : PTI
अधजले शव को उठाना भी हुआ मुश्किल 
विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार के लिए रखे गए शव को कुछ ही देर हुई थी कि शवदाह गृह में खराबी आ गई। इसका तापमान तब तक 250 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। इस कारण शव आधा जल पाया। इसके बाद आई तकनीकी खराबी के दौरान शव को इससे बाहर निकालना भी मुश्किल हो गया था। आधा जल जाने के कारण शव का लकड़ियों से अंतिम संस्कार करना भी संभव नहीं था। ऐसे में मृतक के परिजन भी करीब 20 घंटे तक हिंडन मोक्ष स्थली पर बैठे रहे और शव के अंतिम संस्कार के पूरा होने का इंतजार करते रहे। 
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
घटिया पार्ट्स से हुआ निर्माण, पहले कांटेक्टर फुंका फिर वायरिंग
विद्युत शवदाह गृह की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि जीडीए की ओर से बनवाए गए इस शवदाह गृह में घटिया पार्ट्स और अन्य सामग्री लगाई गई है। शव के अंतिम संस्कार के दौरान इसका तापमान 450 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे मंगलवार को पहले इसका कांटेक्टर फुंका और फिर अंदर की वायरिंग जल गई। निगम के इंजीनियरों ने कांटेक्टर सुबह ही बदलवा दिया था लेकिन 30 एमएम मोटी की वायरिंग नहीं मिली। शहर की बड़ी दुकानों पर काफी तलाश के बाद यह वायरिंग मिली और इसे लगवाया गया। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
सांसद को करना पड़ा हस्तक्षेप
इंदिरापुरम की एटीएस सोसायटी में रहने वाले उद्यमी राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल के बेहद करीबी और शहर के नामचीन किराना व्यापारी के रिश्तेदार थे। विद्युत शवदाह गृह खराब होने से शव का अंतिम संस्कार रुक जाने और निगम अफसरों की लापरवाही की शिकायत उन्होंने राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल से की। सांसद ने नगरायुक्त से फोन पर वार्ता की तो अफसरों में हड़कंप मच गया। नगरायुक्त ने निगम अधिकारियों को मौके पर भेजकर शवदाह गृह को ठीक कराया। 

मुझे विद्युत शवदाह गृह के खराब से अंतिम संस्कार बीच में रुक जाने की शिकायत मिली थी। मैंने नगरायुक्त से वार्ता की और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो इसके लिए इंतजाम करने के लिए कहा है। संक्रमण के इस काल में अधिकारियों को ज्यादा संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।- अनिल अग्रवाल, राज्यसभा सांसद

विद्युत शवदाह गृह में तकनीकी कमी आ जाने से दिक्कत हुई। बुधवार सुबह से मैं खुद शवदाह गृह को ठीक कराने के लिए मोक्ष स्थली पर मौजूद था। उसमें लगे कांटेक्टर और खराब हुई वायरिंग को बदलवा दिया गया है। इसके बाद बुधवार शाम को शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया।- मनोज प्रभात, अधिशासी अभियंता, नगर निगम
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