नजफगढ़ ड्रेन में पहुंचने वाला गंदा पानी केवल यमुना को ही बर्बाद नहीं कर रहा, बल्कि ड्रेन में उफान के बाद बहने वाला पानी कई गांवों में फसलों को भी बर्बाद कर रहा है।
इस पानी से मिट्टी प्रदूषित हो रही है और खेतों की उर्वरकता खत्म होने लगी है। इससे सैंकड़ों किसान प्रभावित हो रहे हैं। इस बारे में ठोस कदम उठाने के लिए अब कृषि मंत्री से गुहार लगाई गई है।
शहर के घरों और कंपनियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी नालों से होते हुए नजफगढ़ ड्रेन तक पहुंचता है। शहर से नजफगढ़ ड्रेन तक पहुंचने के बीच पांच गांव धनकोट, दौलताबाद, बुढ़ेडा, धर्मपुर और मकरौला के करीब दो हजार एकड़ खेतों में गंदा पानी उफान मार कर पहुंच रहा है।
जिससे 60 से अधिक किसान प्रभावित हो रहे हैं। खेतों में गंदा पानी नहीं पहुंचे, इसका ठोस इंतजाम करने के लिए अब सीएम विंडो में शिकायत की गई है। पेशे से किसान व शिकायतकर्ता रमेश वशिष्ठ कहते हैं कि पहली बार 2012 में ग्रीवेंस कमेटी में यह मामला उठा था।
इसके बाद कई अधिकारी बदल गए, लेकिन कोई ठोस उपाय नहीं हुआ।किसानों का कहना है कि जब भी पानी भरता है, फसल बर्बाद हो जाती है। जो फसल बच जाती है उसमें बदबू आने लगती है। अब तो खेतों में पैदावार भी कम होने लगी है।