सेक्टर-104 स्थित हाजीपुर का प्राइमरी स्कूल। बरामदे में जमीन पर बैठकर 130 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। जबकि स्कूल में दो कमरे हैं, जहां कक्षा लगाई जा सकती हैं, लेकिन नहीं लगाई जाती।
वजह, कक्षा की छत के जर्जर होने से कभी भी गिरने का डर। अभिभावकों से जब इसकी जानकारी मिली तो अमर उजाला की टीम ने मौके पर जाकर जायजा लिया।
स्कूल की छत बुरी तरह से जर्जर
स्कूल परिसर में कक्षाओं के लिए दो कमरे और एक प्रिंसिपल का कमरा है। दोनों कक्षों के छतों का प्लास्टर गिर रहा है। सरिया तक दिख रहा है। हालात इतने बुरे हैं कि बारिश होती है तो छतों से रिसकर कक्षा में पानी भर जाता है।
बारिश आने पर स्कूल में करंट का खतरा
स्कूल की जर्जर छत
- फोटो : अमर उजाला
चटाई और दरी पर भी बैठना मुश्किल है। छत भी एक ओर से झुकने की हालत में है। स्कूल की बाहरी दीवारों पर दरार साफ देखी जा सकती हैं। भारी बारिश में बरामदे में भी पानी टपकता है।
दो कक्षाएं सामने के आंगनबाड़ी केंद्र के कमरे में लगानी पड़ती हैं। वहीं, स्कूल का एकमात्र नल मरम्मत की बाट जोह रहा है। यह नल काफी दिनों से खराब है। बच्चों को घर से ही स्कूल का पानी लेकर आना पड़ता है। इसी तरह स्कूल में कई अन्य संसाधनों की भी कमी है।
बारिश आने पर स्कूल में करंट का खतरा
स्कूल की छतों और दीवारों के जर्जर होने से बिजली की वायरिंग और पंखों तक बारिश का पानी आ जाता है। इस वजह से बारिश के दौरान स्कूल में करंट आने का खतरा पैदा होता है। उस दौरान स्कूल की बिजली काट दी जाती है, ताकि किसी तरह का हादसा न हो।
स्कूल में भर जाता है पानी
स्कूल की भूमि बगल की सड़क से नीचे है। यही वजह है कि भारी बारिश के दौरान स्कूल में पानी भर जाता है। एक ओर कक्षा में पढ़ाई नहीं कराई जा सकती। वहीं, बारिश के दौरान बरामदे तक पानी आ जाता है। ऐसे में अगर बच्चों की संख्या घटती है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।