कंपाउंडिंग के नाम पर अवैध उगाही और चढ़ावा न मिलने पर फाइल अटकाने के बाबुओं के खेल पर मई के पहले हफ्ते से लगाम लग जाएगी। जीडीए ने कंपाउंडिंग का सॉफ्टवेयर का ट्रायल शुरू कर दिया है।
इसके जरिए लोग घर बैठे स्वकर प्रणाली की तरह किए अवैध निर्माण और कंपाउंडिंग शुल्क की जानकारी पा सकेंगे। नया सॉफ्टवेयर रैंडम तरीके से यह भी तय करेगा कि किस फाइल की कंपाउंडिंग करनी है।
लोग इस सुविधा के चक्कर में अवैध निर्माण न करने लग जाएं, यह जीडीए अधिकारियों की बड़ी चिंता है। इसीलिए जीडीए अधिकारी इस सॉफ्टवेयर की व्यवहारिकता को परख रहे हैं।
वर्तमान व्यवस्था में जोनवार कंपाउंडिंग की फाइलें पूरी की जाती हैं। संबंधित जोन के एई और जेई कंपाउंडिंग करते हैं। लोगों को कंपाउंडिंग कराने के लिए जीडीए के चक्कर काटने पड़ते हैं।
सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद लोग खुद ही अपने मकान के एरिया की गणना करेंगे। सॉफ्टवेयर के जरिए निर्धारित शुल्क जमा करेंगे। सॉफ्टवेयर के जरिए यह तय होगा कि किस फाइल की कंपाउंडिंग होनी है।
साथ ही पूरे प्रोसेस और कंपाउंडिंग शुल्क की जानकारी घर बैठे इंटरनेट के जरिए आवेदनकर्ता को मिलेगी। जीडीए के एप पर भी इसकी जानकारी ली जा सकेगी।
जीडीए ओएसडी ने बताया कि मई के पहले सप्ताह में नया सॉफ्टवेयर लागू होगा। लोग घर बैठे कंपाउंडिंग कराएंगे, बाद में जीडीए अधिकारी मौके का मुआयना करेंगे।
जीडीए के हेल्पलाइन सेंटर शुरू
जीडीए शहर में तीन हेल्पलाइन सेंटर शुरू करेगा। इनमें से दो सेंटर शुरू हो गए हैं। तीसरा अगले सप्ताह से काम करने लगेगा।
जीडीए ओएसडी विद्याभूषण ने बताया कि योजनाओं के फार्म भरने, घर बैठे नक्शा पास कराने, कंपाउंडिग कराने, प्रापर्टी के दस्तावेज लेने आदि कामों के लिए इंटरनेट की कम जानकारी रखने वालों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन सेंटर शुरू किए जाएंगे।
नीतिखंड-एक स्थित जीडीए की नर्सरी में और जीडीए के स्वागत कक्ष में सेंटर शुरू किए गए हैं।