स्मार्ट सिटी में न केवल सड़क, सीवर, बिजली-पानी की सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि बेआसरा लोगों को आसरा भी मिलेगा। अफोर्डेबल मकान बनाकर लोगों को मुहैया कराए जाएंगे।
शहर की सीवर और ड्रेनेज सिस्टम के लिए परेशानी बन चुकी डेयरियां भी बाहर होंगी। निगम दोनों मुद्दों को स्मार्ट सिटी की डीपीआर में शामिल करेगा।
स्मार्ट सिटी की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने से पहले नगर निगम ने आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों और पार्षदों से सुझाव लेने के लिए गोष्ठी की।
पार्षद जाकिर सैफी ने कहा कि झुग्गियों को हटाए बिना स्मार्ट शहर की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि शहर में झुग्गियों को हटाकर उन्हें मकानों में विस्थापित किया जाए।
आरडब्ल्यूए सदस्य गोपाल माहेश्वरी ने कालोनियों के बीच चल रही डेयरियों को हटाकर शहर से बाहर ले जाने का भी सुझाव दिया। इससे न केवल सफाई होगी, बल्कि सीवर-ड्रेनेज भी जाम नहीं होंगे।
नगर आयुक्त ने दोनों सुझावों को डीपीआर में शामिल करने का आश्वासन दिया है। आरडब्ल्यूए फेडरेशन के साथ हुई बैठक में चेयरमैन तेजेंद्र पाल त्यागी ने 13 स्थानों पर रोजी-रोटी की तलाश में बैठे रहने वाले राज मिस्त्री, बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर के लिए शेल्टर, टॉयलेट्स बनवाए जाने का सुझाव दिया।
उन्होंने ऐसी क्विक रिएक्शन टीम के गठन का सुझाव दिया जो नाली, सड़क टूटने पर तत्काल मौके पर पहुंचे और उसे रिपेयर करे। फेडरेशन के मुख्य समन्वयक मुकेश अग्रवाल ने जगह-जगह एसटीपी बनाए जाने की मांग की।