बीते साल बिना जमीन का कब्जा मिले हवाई बुनियाद पर लांच की गई जीडीए की न्यायखंड स्थित हाउसिंग स्कीम दम तोड़ने वाली है।
जीडीए की इस हवाई स्कीम में लोगों की रकम साल भर तक फंसी रही। अब जीडीए ने जमीन न मिलने पर स्कीम कैंसल करने जारहा है।
ऐसा होने से एक साल से पॉश कालोनी इंदिरापुरम में घर का सपना संजोए 190 लोगों को निराशा हाथ लगेगी। जीडीए आवेदकों को जल्द रिफंड की प्रक्रिया शुरू करेगा।
नवंबर, 2014 में जीडीए ने इंदिरापुरम के न्यायखंड-एक में 370 फ्लैट्स की स्कीम लांच की थी। स्कीम के अंतर्गत 10 मंजिला टावर में टू, थ्री और फोर बीएचके के फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित था।
फ्लैट्स की कीमत 50 लाख से 80 लाख रुपये तक रखी गई थी। तत्कालीन जीडीए अफसरों ने दावा किया था कि प्रोजेक्ट के लिए जीडीए को न्यायखंड-एक में 16009 वर्गमीटर का प्लाट मिल गया है।
प्रोजेक्ट निर्माण के लिए जीडीए अफसरों ने ठेकेदार को करीब 10 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया। वर्तमान में हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए चयनित जमीन पर मालिकाना हक को लेकर केस कोर्ट में चल रहा है।
जीडीए उपाध्यक्ष विजय कुमार यादव ने बताया कि इंदिरापुरम की योजना के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर ड्रा के लिए योजना के आवेदकों का इंतजार लंबा हो रहा है। जमीन न मिल पाने के कारण इस स्कीम को कैंसल किया जाएगा।
डीडीए स्कीम के चलते बढ़ी थी आवेदन डेट
नवंबर-14 में डीडीए ने अपनी हाउसिंग स्कीम का ड्रा निकाला था। डीडीए के स्कीम के कारण जीडीए की स्कीम को आवेदक नहीं मिल रहे थे।
इसके चलते इस स्कीम की अंतिम डेट 30 नवंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर की गई थी। इसके बावजूद महंगे फ्लैट होने के कारण स्कीम में सिर्फ 190 आवेदन ही आए।
ब्याज बचाने को 31 दिसंबर से पहले रिफंड
योजना खत्म होने की अंतिम डेट से लेकर एक साल तक ड्रा न होने की सूरत में जीडीए बिना ब्याज के रिफंड देता है। यदि एक साल से ज्यादा समय बीत जाता है तो जीडीए नियमानुसार आवेदन की जमा राशि पर ब्याज देता है।
आवेदकों को ब्याज न देना पड़े, इसलिए जीडीए अधिकारी 31 दिसंबर 15 से पहले रिफंड दे देना चाहते हैं। आवेदकों ने 10 फीसदी रकम के हिसाब से 5 लाख से आठ लाख रुपये तक जीडीए में जमा कर रखे हैं।