झूठे शपथपत्र के आधार पर जीडीए से एक से अधिक संपत्तियां लेने वालों पर कार्रवाई के रास्ते में जीडीए बाबुओं की हेराफेरी आड़े आ गई है। जीडीए अधिकारियों को इससे जुड़ीं करीब एक हजार फाइलें ही नहीं मिल रही हैं।
जीडीए वीसी के निर्देश पर फाइलों की तलाश शुरू कर दी गई है। जीडीए अधिकारियों ने कुछ फाइलों के मिलने की बात स्वीकारी है। जीडीए वीसी से फाइलें ढूंढने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। आगामी शनिवार को इस फाइलों का निस्तारण होगा।
नियमानुसार जीडीए से एक व्यक्ति एक ही संपत्ति ले सकता है। आवेदन करते समय इस बात का शपथपत्र देना होता है कि प्राधिकरण से पूर्व में कोई संपत्ति नहीं ली गई है।
बीते वर्ष एक मामला सामने आने पर जीडीए ने ऐसे आवंटी जिनके नाम और पिता का नाम एक ही है, उनकी सूची तैयार करवाई थी। इसमें 2924 लोगों के नाम सामने आए थे, जिनको सुनवाई का मौका भी दिया गया था। दोहरा आवंटन पाने वालों में बड़ी संख्या में जीडीए कर्मचारी भी शामिल हैं।
इनमें से जीडीए ने करीब 500 लोगों के आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की थी। 900 फाइलों की जांच में 91 दोहरे आवंटन मिले थे। इनको निरस्त करते हुए कब्जा हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया है।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक दोहरे आवंटन से जुड़ीं करीब एक हजार फाइलें रिकार्ड में नहीं मिलीं हैं। जीडीए वीसी के निर्देश पर फाइलें तलाशी जा रही हैं। कुछ फाइलें मिली भी हैं। अगले सप्ताह तक फाइलें मिल जाने की उम्मीद है।
फाइलों की तलाश में लगीं टीमें
फाइलें रिकार्ड रूम में ही इधर उधर कहीं रखी होंगी। उन्हें तलाश किया जा रहा है। कई मिल गई हैं। आगामी शनिवार को इन फाइलों का जीडीए वीसी के निर्देश पर निस्तारण किया जाएगा। - ज्ञानेंद्र वर्मा, संयुक्त सचिव, जीडीए
जीडीए प्लाट पर निर्माण न कराया तो कैंसिल
प्राधिकरण से प्लाट लेकर भूल जाने वाले आवंटियों को नवनियुक्त जीडीए वीसी ने जोर का झटका दिया है। उन्होंने ऐसे आवंटियों को हर हाल में एक सप्ताह के भीतर प्लाट पर पड़ी गंदगी साफ कराने का निर्देश दिया है।
साथ ही प्लाट का नक्शा पास और निर्माण शुरू कराने के लिए दो माह का समय दिया है। इस अवधि में निर्माण न शुरू कराने वालों के आवंटन निरस्त करने की सूचना जारी की गई है।
रअसल, जीडीए की इंदिरापुरम, वैशाली, शालीमार गार्डन, गोविंदपुरम, अशोक नगर, नेहरूनगर, संजय नगर समेत कई कालोनियों में खाली प्लाट्स पड़े हुए हैं।
इन खाली प्लाट्स में स्थानीय लोग कूड़ा फेंकना शुरू कर देते हैं। इससे पॉश कालोनियों में भी अवैध कूड़ाघर बन जाता है। आबादी के बीच कूड़ाघर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता है।
इसके साथ ही खाली प्लाट्स में अवैध रूप से झुग्गी बस्तियां भी बस जाती हैं। खाली प्लाट में असामाजिक तत्वों की आवाजाही भी होती है। इसके कारण आसपास के लोगों को कई समस्याएं होती हैं।
जीडीए उपाध्यक्ष विजय यादव के मुताबिक कई कालोनियों के लोगों ने आबादी के बीच कूड़ाघर और अवैध बस्तियों की इस समस्या को उठाया है।
एक सप्ताह में प्लाट की गंदगी साफ कराने, जिन प्लाट का नक्शा पास नहीं है उनका नक्शा पास कराने और नक्शा पास वाले प्लाट पर निर्माण शुरू कराने के लिए दो माह का समय दिया गया है।