गौतमबुद्धनगर समेत पूरे एनसीआर का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। आठ साल में 42 फुट तक गिरावट आई है। इसे रोकने के जल्द प्रयास नहीं किए गए तो चंद सालों में जलस्तर सैकड़ों फुट नीचे चला जाएगा।
शहर में जल संचरण के खास प्रयास नहीं किया जाना चिंता का विषय है। गौतमबुद्धनगर में गिरते जलस्तर की पुष्टि खुद केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूए) ने की है। इस संबंध में एनजीटी में रिपोर्ट सौंपी गई है जिसके मुताबिक, सेक्टर-62 में एक साल में जलस्तर करीब 12 फुट गिरा है जबकि 2006 से 2013 के बीच करीब 42 फुट गिरा है।
इसका प्रमुख कारण अवैध जल दोहन पर अंकुश नहीं लग पाना है। साथ ही, बड़े स्तर पर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण भी है। इन्हें बनाते समय कई बिल्डर अवैध तरीके से भूजल का दोहन करते हैं। तीन मंजिल तक बेसमेंट भी बनाए जाते हैं। खुदाई में निकलने वाले पानी को नहर-नालों में बहा दिया जाता है।
स्थान मई 2012 अगस्त 2013
सेक्टर-62 64 77
सेक्टर-72 60 70.3
सेक्टर-92 31 32.03
दनकौर 48 50.03
(आंकड़े फुट में हैं।)
जल स्तर गिरने का प्रमुख कारण
बिल्डर साइट पर भूजल का अवैध दोहन
रंगाई यूनिटों में भूजल इस्तेमाल करना
भारी संख्या में लगे बोर वैल
अनधिकृत वाटर पैकेजिंग यूनिट जो भूजल इस्तेमाल करती हैं
वर्षा जल संरक्षण के लिए प्रयास न होना