शहर में भूमिगत जल प्रदूषित होने की एक वजह यहां कचरा है। शहर से रोजाना निकलने वाला 540 टन कूड़ा भूमिगत पानी के संपर्क में आते ही नाइट्रेट का स्तर बढ़ा रहा है। यह पानी में मिलकर उसे जहरीला कर देता है।
वहीं, ई-वेस्ट से पानी मिलकर आर्सेनिक बनाता है। जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा के पांच गांवों में कैंसर से पिछले कुछ सालों में 57 लोगों की मौत हुई। इसके पीछे प्रदूषित जल को जिम्मेदार माना गया है।
प्रशासन नागरिकों की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए गंगा जल का उपयोग बड़े हो रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में गंगाजल मिलाने में हो रहे खर्च में और बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसी तमाम स्थितियों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को रेन हार्वेस्टिंग कल्चर पर ध्यान देना चाहिए।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग से सुधर सकता है जल का स्तर
नोएडा प्राधिकरण के प्लानिंग विभाग के मुताबिक 2432 हेक्टेयर के ग्रीन बेल्ट में वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये 740 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा किया जा सकता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग से भूमिगत जल की गुणवत्ता को बेहतर किया जा सकता है। वर्तमान में प्रतिदिन नोएडा में 222 मिलियन लीटर भूमिगत जल का उपयोग किया जाता है। वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी के अनुसार, उसे शुद्ध करने के लिए 48 मिलियन लीटर गंगा जल की जरूरत होती है। मास्टर प्लान 2021 के अनुसार, 2021 तक शहर में 553 मिलियन लीटर भूमिगत जल की प्रतिदिन जरूरत होगी। इसके लिए 302 मिलियन लीटर गंगा जल की हर दिन जरूरत होगी।
नोएडा में जल प्रदूषण का स्तर
पेयजल की गुणवत्ता और उपलब्धता- 16.67 फीसदी
जल प्रदूषण- 89.71 फीसदी