प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान गंगा का जल नहाने लायक था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यह बात राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी नई रिपोर्ट में कही है। यह रिपोर्ट सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई है।
सीपीसीबी का दावा है, अलग तारीखों पर एक ही जगह और एक दिन में अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए नमूनों के आंकड़ों में भिन्नता थी। इनसे नदी के समग्र जल की गुणवत्ता का पता नहीं चलता। इससे पहले, सीपीसीबी ने 17 फरवरी को एनजीटी को दी रिपोर्ट में कहा था कि विभिन्न स्थानों पर फीकल कोलीफॉर्म (एफसी) का स्तर प्राथमिक मानकों के अनुरूप नहीं मिला।
बोर्ड की 28 फरवरी की नई रिपोर्ट बताती है कि विश्लेषण 12 जनवरी से 22 फरवरी तक सामूहिक स्नान के दस स्थानों पर किया गया। निगरानी के लिए 20 बार दौरा किया गया। इसके मुताबिक नदी में एफसी की औसत मात्रा 1,400 थी, जबकि इसकी मानक सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 लीटर है। घुलित ऑक्सीजन (डीओ) मानक 5 मिलीग्राम प्रति लीटर की तुलना में 8.7 था।
गंगा में पांच और यमुना में दो जगह की निगरानी
रिपोर्ट के मुताबिक, अमृत स्नान वाले दिन समेत सप्ताह में दो बार गंगा में पांच स्थानों व यमुना नदी में दो स्थानों पर जल निगरानी की गई। सीपीसीबी ने पानी की गुणवत्ता को पीएच, डीओ व एफसी के पैमानों पर जांचा। विशेषज्ञ समिति ने आंकड़ों में बदलाव के मुद्दे की जांच की और कहा कि ये आंकड़े एक विशिष्ट स्थान व समय पर जल की गुणवत्ता को दर्शाते हैं।